Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

चीन में मेडिकल की पढ़ाई के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सरकार ने जारी की एडवाइजरी

Advertiesment
हमें फॉलो करें medical students
, शनिवार, 10 सितम्बर 2022 (17:48 IST)
बीजिंग। भारत ने चीन में चिकित्सा की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को एक विस्तृत परामर्श जारी किया है जिसमें उन्हें चीन में पढ़ाई करने के बाद होने वाली कई तरह की समस्याओं के प्रति आगाह किया गया है। परामर्श में छात्रों को परीक्षा उत्तीर्ण होने के कम प्रतिशत, आधिकारिक भाषा पुतोंग्हुआ सीखने की बाध्यता और भारत में चिकित्सक के तौर पर प्रैक्टिस करने के कड़े नियमों के बारे में बताया गया है।
 
यह परामर्श ऐसे समय जारी किया गया है, जब चीन के चिकित्सा संस्थानों में पढ़ने वाले कई भारतीय छात्र बीजिंग के कोविड वीजा प्रतिबंध के कारण 2 साल से ज्यादा समय से घर बैठे हैं। आधिकारिक अनुमान के अनुसार वर्तमान में विभिन्न चीनी विश्वविद्यालयों में 23 हजार से ज्यादा भारतीय छात्रों ने दाखिला लिया हुआ है जिनमें से बड़ी संख्या चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले छात्रों की है।
 
कोविड वीजा प्रतिबंधों के 2 साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद चीन ने हाल में कुछ चुनिंदा छात्रों को वापस आने के लिए वीजा जारी किया था, परंतु उनमें से अधिकांश छात्र वापस आने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि सीधी उड़ान उपलब्ध नहीं है और बीजिंग में क्वारंटाइन की पाबंदियों को देखते हुए दोनों देशों के बीच सीमित उड़ान सुविधाओं के लिए बातचीत जारी है।
 
इस बीच चीनी चिकित्सा कॉलेजों ने भारत और विदेश से नए छात्रों का प्रवेश शुरू कर दिया है। इस परिप्रेक्ष्य में बीजिंग में भारतीय दूतावास ने गुरुवार को उन छात्रों के लिए एक विस्तृत परामर्श जारी किया, जो चीन में चिकित्सा की पढ़ाई करना चाहते हैं। परामर्श में उन कठिनाइयों के बारे में बताया गया है, जो चीन में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को झेलनी पड़ सकती हैं। इसके अलावा पढ़ाई के बाद भारत में चिकित्सा की प्रैक्टिस करने के लिए उन्हें जिस योग्यता को हासिल करना पड़ता है उसके कड़े नियमों की भी जानकारी दी गई है।
 
परामर्श में कहा गया है कि भारत में प्रैक्टिस के लिए 2015 से 2021 के बीच केवल 16 प्रतिशत छात्र ही परीक्षा उत्तीर्ण कर सके। इस दौरान 40,417 छात्रों में से केवल 6,387 छात्र ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा आयोजित विदेशी चिकित्सा स्नातक (एफएमजी) परीक्षा उत्तीर्ण कर सके। परामर्श में कहा गया कि 2015 से 2021 के बीच जिन भारतीय छात्रों ने चीन के 45 मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालों से क्लिनिकल चिकित्सा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई की, उनमें से केवल 16 प्रतिशत ही पास हो सके।
 
परामर्श में कहा गया कि जो माता-पिता अपने बच्चों को चीनी विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए भेजना चाहते हैं, उन्हें इस तथ्य का संज्ञान लेना चाहिए। इसके अलावा दूतावास से जारी परामर्श में यह भी कहा गया कि हर विश्वविद्यालय की फीस अलग-अलग है और प्रवेश लेने से पहले उन्हें सीधे विश्वविद्यालय से संपर्क करना चाहिए।(भाषा)(फ़ाइल चित्र)

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

64MP कैमरे और रंग बदलने वाले Fluorite Ag Glass के साथ लांच होगा Vivo V25 5G, टीजर ने मचाया धमाल