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भारत के मंगल मिशन को स्पेस पायनीयर अवॉर्ड

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ISRO  Mangal mission
वाशिंगटन। इसरो के मंगल अभियान दल ने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल करने की दुर्लभ उपलब्धि दर्ज कर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड में 2015 का स्पेस पायनीयर अवॉर्ड जीत लिया है।
 
नेशनल स्पेस सोसाइटी का यह पुरस्कार 20-24 मई को टोरंटो में आयोजित सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष विकास सम्मेलन में इसरो के मार्स ओर्बीटर प्रोग्राम टीम को दिया जाएगा। भारत का मंगल अभियान 5 नवंबर 2013 को छोड़ा गया था और वह 24 सितंबर को मंगल की कक्षा में पहुंचा।
 
सोसाइटी ने एक बयान में कहा कि इस अभियान ने पहली ही कोशिश में दो महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। प्रथम, कोई भारतीय अंतरिक्षयान पहली ही कोशिश में मंगल की कक्षा में पहुंच गया जो कोई दूसरा देश नहीं कर सका।
 
अंतरिक्षयान उच्च एपोएप्सिस (वह बिंदु जहां परिक्रमा कर रही कोई चीज उस वस्तु से सबसे ज्यादा दूरी पर होती है जिसके गिर्द वह परिक्रमा करती है) वाली दीर्घवृत्ताकार कक्षा में है और उसमें मंगल की ‘फुल-डिस्क’ रंगीन तस्वीर लेने वाला उच्च रेजोल्यूशन वाला कैमरा लगा है।
 
बयान में कहा गया है, 'अतीत में बहुत कम फुल-डिस्क तस्वीरें ली गई हैं, ज्यादातर ग्रह के समीप, क्योंकि ज्यादातर तस्वीरें मैपिंग मोड में सीधे नीचे देखते हुए ली गई हैं। ये तस्वीरें ग्रह वैज्ञानिकों की मदद करेंगी।' मार्स आर्बिटर प्रोग्राम टीम बंगलूर में स्थित है और उसका नेतृत्व एम. अन्नादुरै कर रहे हैं। (भाषा)
 

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