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भारत में संस्कृत बनाम जर्मन भाषा पढ़ाए जाने का मसला भी गूंजा

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नरेन्द्र मोदी
-अनुपमा जैन 
 
ब्रिसबेन। भारत के केंद्रीय विद्यालयों में संस्कृत बनाम जर्मन भाषा पढ़ाए जाने के मसलेकी गूंज आज यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के बीच हुई वार्ता में भी सुनाई दी।
सुश्री एंजेला मर्केल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान भारत के केंद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के रूप में संस्कृत के विकल्प के तौर पर जर्मन भाषा को हटाने के प्रस्ताव का मुद्दा उठाया। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें भारतीय शिक्षा प्रणाली की सीमाओं के भीतर इस मसले पर विचार करने का आश्वासन दिया।
 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि सुश्री मर्केल ने भारतीय स्कूलों में संस्कृत के विकल्प के रूप में जर्मन भाषा पढ़ाए जाने के मुद्दे को उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस पर विचार करने तथा यह देखने का अनुरोध किया कि आगे क्या सर्वश्रेष्ठ रास्ता हो सकता है।
 
प्रवक्ता के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे खुद भारत में बच्चों के अन्य भाषाएं सीखने के समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रणाली के दायरे में इस पर क्या सर्वश्रेष्ठ हो सकता है, हम इस पर काम करेंगे। 
 
सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात खासे गर्मजोशीभरे माहौल में हुई। इस दौरान सुश्री मर्केल ने कहा कि उनका देश  भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध और प्रगाढ़ बनाना चाहता है। वह मोदी की जर्मनी यात्रा की उत्सुकता से राह देख रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन द्वारा जारी ट्वीट के अनुसार, सुश्री मर्केल ने मुलाकात में मोदी से कहा, 'हमारे संबंध मजबूत हो रहे हैं। हम आपके जर्मनी दौरे का इंतजार कर रहे हैं।'
 
गौरतलब है कि जर्मन भाषा बनाम संस्कृत का मसला भारत में जर्मनी के राजदूत माइकल स्टीनर भी भारत सरकार के साथ इसे उठा चुके हैं और व्यावहारिक समाधान की उम्मीद जता चुके हैं।
 
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने संस्कृत के विकल्प के रूप में जर्मन भाषा को हटाने का फैसला किया, जिसके बाद करीब 500 केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा छठी से आठवीं के करीब 70,000 बच्चों से जर्मन की जगह संस्कृत भाषा पढ़ने को कहा जा सकता है।
 
वर्ष 2011 में केंद्रीय विद्यालयों और जर्मनी के गोयथे इंस्टीट्यूट-मैक्स मूलर भवन के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें जर्मन भाषा को तीसरी भाषा बनाया गया था। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने सरकार के इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था तीन-भाषा के फॉर्मूले का उल्लंघन है। हालांकि उन्होंने कहा कि जर्मन भाषा 'रुचि के अतिरिक्त विषय' के तौर पर पढ़ाई जाती रहेगी।
 
तीन-भाषा के फॉर्मूले में स्कूलों में हिन्दी, अंग्रेजी और एक आधुनिक भारतीय भाषा पढ़ाई जाती है। संस्कृत भाषा के शिक्षकों ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक अपील दायर करके आरोप लगाया था कि केंद्रीय विद्यालयों ने शिक्षा नीति के खिलाफ संस्कृत की जगह तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन को अपनाया है। (वीएनआई)

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