Publish Date: Mon, 09 Jan 2017 (08:33 IST)
Updated Date: Mon, 09 Jan 2017 (08:36 IST)
मुख्य विपक्षी दल सीपीएन-यूएमएल और अन्य सीमांत पार्टियों के विरोध के बीच नेपाल सरकार ने रविवार को संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। इसके माध्यम से आंदोलनरत मधेशी पार्टियों की मांगों को पूरा करने का प्रयास किया गया है।
विधेयक गत 29 नवंबर को ही संसद सचिवालय में पंजीकृत कर दिया गया था, लेकिन सीपीएन-यूएमएल की अगुआई में नौ पार्टियों के लगातार विरोध के कारण प्रधानमंत्री प्रचंड के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार इसे सदन में पेश नहीं कर सकी थी।
विपक्षी दलों का दावा है कि विधेयक राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है। इसे वापस लिया जाना चाहिए। यही वजह थी कि जब संसदीय कार्य मंत्री अजय नायक विधेयक पेश कर रहे थे, विपक्षी सांसद विरोधस्वरूप खड़े थे।
विधेयक का उद्देश्य आंदोलनरत मधेशी और जातीय समूहों की मांग को समायोजित करना है। इसमें नागरिकता और सीमांकन सहित अन्य दूसरे मुद्दे शामिल हैं। प्रांतीय सीमा का पुनर्सीमांकन और नागरिकता का मुद्दा मधेशियों की दो प्रमुख मांगें हैं।