लंदन। लंदन में बतौर मेयर 2012 के ओलंपिक की शानदार मेजबानी से लेकर बोरिस जॉनसन ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने वाले 'ब्रेक्जिट' अभियान में कंजर्वेटिव दल के अगुवा की भूमिका निभाई। हालांकि कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी के बाद बतौर प्रधानमंत्री इससे निपटने के तौर-तरीकों और लॉकडाउन के दौरान नियमों का उल्लंघन कर सरकारी कार्यालय में होने वाली पार्टियों ने जॉनसन की छवि को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा, पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों से निपटने के मामले में भी उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
बोरिस जॉनसन की राजनीतिक यात्रा कुछ इस तरह रही :
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2001-2008 : जॉनसन ने संसद में हेनले सीट का प्रतिनिधित्व किया।
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2008-2016 : लंदन के मेयर का पदभार संभाला। 2012 में लंदन में हुए ओलंपिक खेलों की मेजबानी की।
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2016 : यूरोपीय संघ से ब्रिटेन को अलग करने के अभियान में सह-नेता के तौर पर अगुवाई की। जॉनसन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री एवं कंजर्वेटिव पार्टी के अपने सहयोगी डेविड कैमरन के विपरीत जाकर अभियान को चलाया। 23 जून 2016 को राष्ट्रीय जनमत के दौरान मतदाताओं के बेक्जिट को मंजूरी देने के बाद कैमरन ने पद से इस्तीफा दे दिया था।
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2016-2018 : कैमरन के बाद प्रधानमंत्री पद संभालने वाली थेरेसा में सरकार में जॉनसन विदेश मंत्री रहे। बाद में बेक्जिट के प्रति नरम रणनीति अपनाने के विरोध में जॉनसन ने जुलाई 2018 में पद से इस्तीफा दे दिया।
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7 जून, 2019 : थेरेसा ने ब्रेक्जिट समझौते को वापस लेने के लिए संसद को मनाने में विफल रहने पर कंजर्वेटिव पार्टी के नेता के रूप में इस्तीफा दे दिया।
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23 जुलाई, 2019 : कंजर्वेटिव सदस्यों द्वारा किए गए मतदान में जॉनसन दल के नेता चुने गए और अगले दिन जॉनसन ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। हालांकि वह एक ऐसी अल्पसंख्यक सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं जो कानून पारित करने के लिए उत्तरी आयरलैंड की डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी के वोट पर निर्भर है। जॉनसन ने जोर देकर कहा कि ब्रिटेन 31 अक्टूबर को हर हाल में यूरोपीय संघ को छोड़ देगा।
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28 अगस्त 2019 : जॉनसन ने मध्य अक्टूबर तक संसद को बंद रखने की घोषणा की ताकि विरोधियों को ब्रेक्जिट समझौते में बाधा डालने का मौका नहीं मिले।
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3 सितंबर, 2019 : कंजर्वेटिव पार्टी के 21 बागी सांसदों ने ब्रेक्जिट वार्ता को विस्तार देने संबंधी कानून का समर्थन किया, जिसके बाद बागियों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
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24 सितंबर, 2019 : ब्रिटेन के उच्चतम न्यायालय ने संसद को निलंबित रखने के सरकार के कदम को गैर-कानूनी करार दिया।
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19 अक्टूबर, 2019 : जॉनसन ने ईयू से एक बार फिर ब्रेक्जिट को टालने का आग्रह किया और नई समयसीमा 31 जनवरी तय की गई।
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6 नवंबर, 2019 : संसद भंग कर दी गई और मध्य दिसंबर में होने वाले चुनाव प्रचार के दौरान जॉनसन ने अपनी ब्रेक्जिट रणनीति के लिए जनता से समर्थन मांगा।
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12 दिसंबर, 2019 : जॉनसन को आम चुनाव में 80 सीटों पर जीत मिली और पूर्ण बहुमत की सरकार का गठन हुआ। इस जीत ने जॉनसन को मार्गरेट थैचर के बाद चुनावी रूप से सबसे सफल कंजर्वेटिव नेता बनाया।
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23 जनवरी, 2020 : ब्रिटिश संसद से मंजूरी मिलने के बाद ब्रेक्जिट समझौते ने कानूनी रूप लिया।
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23 मार्च, 2020 : जॉनसन ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर ब्रिटेन में पहले लॉकडाउन की घोषणा की।
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3-4 नवंबर, 2021 : जॉनसन की सरकार ने कंजर्वेटिव सांसदों को ओवेन पैटर्सन के निलंबन को टालने के लिए नैतिकता नियमों में बदलाव का समर्थन करने का आदेश दिया। पैटर्सन जॉनसन के समर्थक थे, जिन्हें लॉबिंग नियमों के उल्लंघन के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। नियम पारित हो गया। एक दिन बाद सभी दलों के सांसदों द्वारा रोष जताए जाने के बाद जॉनसन ने सांसदों को पैटर्सन के निलंबन पर मतदान करने की अनुमति दी। पैटर्सन ने इस्तीफा दे दिया।
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30 नवंबर, 2021 : आरोप लगे कि कोविड-19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन कर नवंबर और दिसंबर 2020 के दौरान सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों ने पार्टियां कीं। पार्टीगेट करार दिए गए इस मामले में आरोप लगाया गया कि लॉकडाउन का उल्लंघन कर दर्जनभर से अधिक पार्टी की गईं। जॉनसन ने आरोपों को खारिज किया, हालांकि विपक्ष ने सरकार की आलोचना की।
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8 दिसंबर, 2021 : जॉनसन ने पार्टीगेट मामले की जांच को मंजूरी दी। जॉनसन पर पद छोड़ने का दबाव पड़ा।
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12 अप्रैल, 2022 : लॉकडाउन के दौरान एक पार्टी में शामिल होने के लिए जॉनसन पर 50 पाउंड का जुर्माना लगा। जॉनसन ने खेद जताया लेकिन कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह नियम तोड़ रहे हैं।
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26 मई, 2022 : सरकार ने तेल एवं गैस कंपनियों पर टैक्स संबंधी अपने फैसले को वापस लिया।
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6 जून, 2022 : जॉनसन ने मामूली अंतर से विश्वास मत जीता। सत्ता पर उनकी पकड़ कमजोर हुई।
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30 जून, 2022 : लंदन के एक क्लब में 2 मेहमानों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप के बाद क्रिस पिंचर ने कंजर्वेटिव पाटी के उप मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दिया। पिंचर पर पूर्व में भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगे। सवाल खड़ा हुआ कि क्या पिंचर को जिम्मेदारी दिए जाने के समय जॉनसन को आरोपों के संबंध में जानकारी थी या नहीं?
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5 जुलाई, 2020 : जॉनसन ने पिंचर मामले से निपटने के तौर-तरीकों को लेकर माफी मांगी। जॉनसन सरकार के दो सबसे वरिष्ठ मंत्रियों ऋषि सुनक और साजिद जाविद ने पद से इस्तीफा दिया।
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6 जुलाई, 2022 : करीब 3 दर्जन कनिष्ठ मंत्रियों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया। जॉनसन के नेतृत्व पर निशाना साधा।
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7 जुलाई, 2022 : जॉनसन ने कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दिया। हालांकि नया नेता चुनने की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रधानमंत्री का पद संभालने की बात कही।
(भाषा)