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सिखों की पगड़ी पर प्रतिबंध से पलटा ब्रिटेन

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Sikh
लंदन। नए कानून के आज प्रभावी होने के बाद अब समूचे ब्रिटेन में सिखों को कार्यस्थल पर पगड़ी पहनने को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना होगा।
 
सिख समूह कई वर्षों से ब्रिटेन के रोजगार कानून की उस खामी को खत्म करने के लिए अभियान चला रहे थे, जिसमें सिख पगड़ी पहनने को लेकर भ्रम व्याप्त था।
 
लेकिन अब नए कानून के मुताबिक, सिख पगड़ी या हेलमेट में से किसी एक को पहनने का चुनाव कर सकेंगे और अधिकांश कार्यस्थलों पर उन्हें हेलमेट पहनने की कानूनी बाध्यता से मुक्त रखा जाएगा।
 
ब्रिटेन की रोजगार मंत्री प्रीति पटेल ने कहा, 'यह बदलाव बताता है कि आप जो भी हैं, आपकी पृष्ठभूमि चाहे जो भी हो और आप चाहे जिस किसी भी उद्योग में काम करना चाहते हों - अगर आप कड़ी मेहनत करते हैं और जीवन में कुछ हासिल करना चाहते हैं तो यह सरकार आपके पक्ष में है।'
 
उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री के ‘इंडियन डायस्पोरा चैम्पियन’ और रोजगार मंत्री के तौर पर मुझे उस सरकार का हिस्सा बनकर काफी खुशी है जिसने यह बदलाव किया है। मुझे गर्व है कि ब्रिटेन ऐसे प्रतिभावान, महत्वाकांक्षी और मेहनतकश समुदाय का घर है।'
 
1989 से सिखों को निर्माण उद्योग में हेलमेट पहनने के जरूरी नियम से मुक्त रखा गया था, लेकिन कानूनी खामी के कारण फैक्ट्रियों और गोदामों जैसे कम खतरे वाले उद्योगों में ऐसा नहीं था। 
 
इसका अर्थ था कि कई नौकरियों में अगर सिख सुरक्षा के लिहाज से जरूरी हेलमेट के बजाय पगड़ी पहनने का चुनाव करते हैं तो उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है अथवा यहां तक कि उन्हें बख्रास्त भी किया जा सकता है।
 
सिख काउंसिल यूके के प्रवक्ता गुरिंदर सिंह जोसन ने कहा कि हमें खुशी है कि संसद ने हमारे अभियान को सुना और कानून में यह जरूरी बदलाव किया। दायरा बढ़ाने से ब्रिटेन में सिखों को वास्तविक पहचान मिलेगी क्योंकि सिख अब अपनी धार्मिक पहचान को बरकरार रखते हुए पगड़ी पहनकर काम कर सकेंगे।
 
सभी कार्यस्थलों में मौजूदा छूट के लिए रोजगार कानून में डीरेगुलेशन बिल 2015 में एक नया खंड जोड़ा गया है। (भाषा)

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