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युवराज सिंह का क्या कसूर

शराफत खान

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इंडियन प्रीमियर लीग
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के चौथे सीजन में विस्फोटक बल्लेबाज युवराज सिंह के हाथों में पुणे वॉरियर्स टीम की कमान है। पहले दो मैचों में टीम ने जीत हासिल करके सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा, लेकिन इसके बाद उन्हें लगातार पांच हार का सामना करना पड़ा। कप्तान होने के नाते युवराज ने हार की जिम्मेदारी भी ली, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि युवी ही इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं। टीम ने अपनी गलतियों से सीख नहीं ली, इसमें युवराज की कप्तानी का क्या कसूर।

PTI
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युवराज कप्तान हैं, टीम को दिशा दे सकते हैं, अपने प्रदर्शन से खिलाड़ियों को प्रेरित कर सकते हैं, जो वे कर भी रहे हैं, लेकिन अगर अन्य खिलाड़ी योगदान नहीं देंगे तो निश्चत तौर पर टीम दौड़ में पीछे रह जाएगी। पुणे वॉरियर्स के लिए युवराज ने एक बल्लेबाज के तौर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है, लेकिन अन्य खिलाड़ियों की नाकामी की वजह से वे टीम को जीत नहीं दिला सके। युवराज ने अब तक सात मैचों में 58.00 की औसत से 232 रन बनाए हैं और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 136.47 रहा है। युवराज ने अब तक आईपीएल-4 में सबसे ज्यादा छक्के (13) जड़े हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि युवी के प्रयास में कोई कमी नहीं है।

युवराज के अलावा जेसी रायडर और रॉबिन उथप्पा ही पुणे के लिए ठीक ठाक खेल रहे हैं। अन्य कोई बल्लेबाज टीम के लिए योगदान नहीं दे रहा है। यही पुणे वॉरियर्स की हार की वजह है।

शुक्रवार को हुए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मैच में पुणे वॉरियर्स को 26 रन से शिकस्त मिली। रायडर, युवराज और उथप्पा ने रन बनाए, लेकिन अन्य बल्लेबाज फिर नाकाम रहे। मनीष पांडे ने 23 गेंद खेलकर केवल 19 रन बनाए, वहीं टिम पैनी ने 17 गेंद खेलकर 8 ही रन जुटाए। इन दोनों बल्लेबाजों की सुस्त बैटिंग से मैच का फर्क तय हो गया। अगर इन बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए होते तो यह मैच पुणे वॉरयिर्स के कब्जे में आ सकता था। जब उथप्पा और युवराज खेलने आए तब तक जीत के लिए आवश्यक रन औसत 15 रन प्रति ओवर से भी ज्यादा हो चुका था, लेकिन फिर भी इन दोनों बल्लेबाजों ने किला लड़ाया। युवराज ने 23 गेंदों में 41 रन कूटे, लेकिन शीर्षक्रम के बल्लेबाजों की सुस्ती की भरपाई नहीं कर पाए।

पुणे की हार के लिए युवराज की कप्तानी को दोष देना गलत है। पुणे को सही टीम कॉम्बिनेशन की जरूरत है। यह कहा जा सकता है कि पुणे वॉरयिर्स को रायडर के साथ एक जिम्मेदार सलामी बल्लेबाज की जरूरत है। साथ ही मध्यक्रम में उसे मनीष पांडे और मिथुन मन्हास से बेहतर प्रदर्शन की आस है।

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