आईपीएल में 'जादू की झप्पी'

कुछ समय पहले दो फिल्में आई थीं जिनका टाइटल था 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' और 'लगे रहो मुन्ना भाई'। राजकुमार हिरानी की यह फिल्में हिट भी रही थीं।

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इन फिल्मों का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि इन्होंने समाज के बीच दो जुमले छोड़े, जो आज भी लोकप्रिय हैं- पहला 'जादू की झप्पी' और दूसरा 'गाँधीगीरी'। इसके बाद गाँधीगीरी के नए-नए रूप हमें समाज में देखने को मिले। छात्र राजनीति से लेकर प्रदेश और देश की राजनीति में भी इनका खुलकर उपयोग लगा।

परंतु हम यहाँ गाँधीगीरी की नहीं, बल्कि जादू की झप्पी की चर्चा कर रहे हैं। इस फिल्म का नायक मुन्नाभाई (संजय दत्त) आलोचकों को भी सीने से लगाकर अपना बना लेता था। संजू की इसी अदा को इस फिल्म में 'जादू की झप्पी' नाम दिया गया था।

  अपने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा रही प्रीति जिंटा का उत्साह देखते ही बनता था। जीत के बाद वे मैदान में दौड़कर आईं और उन्होंने युवराज को 'जादू की झप्पी' देते हुए अपने गले लगा लिया। प्रीति की इस जादू की झप्पी का असर ऐसा हुआ कि टीम मानो हारना ही भूल गई      
ऐसी ही एक जादू की झप्पी का कमाल हमें आईपीएल टूर्नामेंट में देखने को मिल रहा है। आप सोच रहे होंगे कि गेंद और बल्ले के द्वंद्व में 'जादू की झप्पी' कहाँ से आ गई, मगर यह उतना ही सच है, जितना क‍ि आईपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट।

याद कीजिए पंजाब किंग्स इलेवन का पहला मैच, जिसमें उसने धोनी के धुरंधरों के सामने 33 रनों की करारी शिकस्त झेली थी। उसके बाद राजस्थान रॉयल्स ने इन 'पंजाबी पुत्तरों' को छह विकेट से रौंद दिया।

लगातार दो पराजयों से टीम की मालकिन डिंपल गर्ल प्रीति जिंटा कैमरे के सामने निराश तो नजर आईं, लेकिन उनके उत्साह में कोई कमी नहीं आई। टीम के साथ वे हर मैच में मौजूद थीं, परिणाम चाहे कुछ भी रहा हो।

मोहाली में 25 अप्रैल को किंग्स इलेवन ने हार के सिलसिले के तोड़ा और एक पंजाबी (हरभजनसिंह) की ही अगुवाई में खेल रही मुंबई इंडियन्स की टीम को 66 रन से बुरी तरह हरा दिया।

दर्शकों के बीच रहकर अपने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा रही प्रीति जिंटा का उत्साह देखते ही बनता था। जीत के बाद वे मैदान में दौड़कर आईं और उन्होंने कप्तान युवराज को 'जादू की झप्पी' देते हुए अपने गले लगा लिया।

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प्रीति की इस जादू की झप्पी का असर ऐसा हुआ कि टीम मानो हारना ही भूल गई। टीम के हर एक खिलाड़ी में 'मैन ऑफ द मैच' बनने की होड़-सी लग गई, क्योंकि हर कोई प्रीति को अपनी बाँहों में जो भरना चाहता था। चाहे वे मोहाली में आँसू बहाने वाले श्रीसंथ हों या फिर मुंबई में प्रीति के गले लगने वाले ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी शान मार्श।

मासूम-सी दिखने वाली बॉलीवुड की इस अभिनेत्री की जादू की झप्पी का ही कमाल है कि किंग्स इलेवन अंक तालिका में 16 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर काबिज है और उसका सेमीफाइनल में खेलना तो तय है ही। तो है न प्रीति की जादू की झप्पी का करिश्मा, जिसने टीम में जीत का जुनून भर दिया।

हाँ, यहाँ हम आपको एक बात और याद दिलाना चाहेंगे कि प्रीति के इस जोश के पीछे जो शख्स था, वह और कोई नहीं बल्कि उनके प्रेमी उद्योगपति नैस वाडिया थे। लगभग हर मैच में वे प्रीति के साथ खड़े नजर आए।

काश! कप्तान राहुल द्रविड़ की आलोचना करने वाले बेंगलोर रॉयल चैलेंजर्स के मालिक शराब किंग विजय माल्या भी प्रीति से कुछ सबक लेते और टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए कुछ इसी तरह की जुगत भिड़ाते। हालाँकि माल्या ने बॉलीवुड सुंदरी कैटरीना कैफ को टीम का ब्रांड एंबेसडर जरूर बनाया था, मगर उनका अंदाज प्रीति जैसा कारगर नहीं था और यही कारण है कि उनकी टीम नीचे से दूसरे क्रम पर है और सेमीफाइनल की दौड़ से भी बाहर हो चुकी है।

प्रीति के बॉलीवुड सहयोगी और किंग खान के नाम से मशहूर शाहरुख खान भी क्रिकेट के मैदान में अपना जादू नहीं बिखेर सके। और अब तो लगातार पराजयों के बाद उनके और कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान के संबंधों में भी खटास आ गई है। दोनों के बीच मतभेद की खबरें भी आने लगी हैं।

तो आप भी तैयार हो जाइए प्रीति की इस तरकीब पर अमल करने के लिए, असफलता आपके आसपास भी नहीं फटकेगी..!
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