दिन-प्रतिदिन बढ़ते अपराधों में, आपके पासपोर्ट की प्रतिलिपि बनाकर उसका आसानी से उपयोग कर पाना किसी भी चालबाज या चालाक अपराधी के लिए एक आसान कार्य है। आपके पास्पोर्ट की सुरक्षा की परेशानियों का हल अब जल्द ही आपके सामने होगा।हर क्षेत्र में बढ़ते अपराध से निपटने के लिए तकनीक का विकास भी निरंतर जारी है और इसी विकास के चलते, पासपोर्ट के सुरक्षा इंतजाम के लिए इसके साथ तकनीक को जोड़ा जाएगा। यह कैसे संभव है? तो लीजिए इसका जवाब भी हाजिर है-आपकी इस परेशानी का हल है बायोमैट्रिक्स के पास। बायोमैट्रिक्स के जरिए ‘मशीन आइडेंटिफिकेशन फीचर’ का विकास किया गया है। इस फीचर का नाम है ‘फेस (चेहरा) या आइरिस (आँख की पुतली) रिकग्निशन फीचर’।इसके माध्यम से चेहरे या आँख की पुतली की सहायता से यह पता लगाया जा सकता है कि यह पासपार्ट आपका है या नहीं। |
| आपके पास्पोर्ट की सुरक्षा की परेशानियों का हल अब जल्द ही आपके सामने होगा।
हर क्षेत्र में बढ़ते अपराध से निपटने के लिए तकनीक का विकास भी निरंतर जारी है और इसी विकास के चलते, पासपोर्ट के सुरक्षा |
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क्योंकि इस बायोमेट्रिक फीचर को पासपोर्ट में नहीं लगाया जा सकता इसलिए पासपोर्ट पर एक चिप का लगा होना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
पासपोर्ट में पीछे की तरफ एक चिप लगाई जाएगी जिसका आकार एक डाक टिकट के बराबर होगा और उसके साथ ही एक एन्टिना भी होगा।
इसका निर्माण एनआईसी, आईआईटी कानपुर और स्मार्ट कार्ड वितरकों के सहयोग से हो पाया है। इसके लिए उपयोग किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम आईआईटी के द्वारा बनाया गया है जिसे SCOSTA- CL नाम दिया गया है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग सिर्फ भारत में ही उपयोग किया जाएगा।
आईसीएओ बहुत समय से पासपोर्ट की सुरक्षा के लिए इस तरह की तकनीक के बारे में सोच रही थी। बार कोड या मैग्नेटिक स्ट्राइप्स को पासपोर्ट पर जानकारी स्टोर करने के लिए उपयोग कर पाना मुश्किल था।
चिप तकनीक के विकास की वजह से जानकारी स्टोर कर पाना अब आसान हो गया है।
मार्च 2006 में ब्रिटेन ने भी इस तरह का ई-पासपोर्ट लागू किया था। 11 सितंबर के हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने यह अपील की थी कि सभी देशों में इस तरह का बायोमैट्रिक पास्पोर्ट लागू कर दिया जाए।
भारत में इस पासपोर्ट के लिए बनाई गई कमेटी का नेतृत्व, सीपीवी डिविजन के संयुक्त सचिव कर रहे हैं।