आपके ई-मेल पर आतंकियों की नजर
सोचिए अगर आपके ई-मेल द्वारा दी जाए बम की सूचना
जब प्रमुख बमकांडों के ई-मेल से जुड़ने की बात निकली तो इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का ध्यान इस ओर गया। इस एक ई-मेल ने खबरों के बाजार को गर्मा दिया। इसके पहले तक बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि एक ई-मेल के आधार पर भी क्या किसी को पकड़ा जा सकता है और एक ई-मेल इतना बखेड़ा खड़ा कर सकता है। ई-मेल एड्रेस चोरी और अपने ई-मेल एड्रेस के गलत उपयोग को लेकर ऐसे में शंकाएँ उठना स्वाभाविक है। इन तमाम बातों के बीच यह बात भी उठती है कि किसी को ई-मेल करना कितना सुरक्षित है, क्या आपका ई-मेल कोई और भी पढ़ सकता है और ई-मेल के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए? इन सभी परेशानियों और इनसे जुड़े मुद्दों पर नजर डालती हमारी यह रिपोर्ट।क्या है ई-मेल की पूरी प्रक्रियादरअसल जैसे ही आप ई-मेल करते हैं तो सबसे पहले ई-मेल आउटगोइंग सर्वर पर जाता है और यहाँ से उस मेल पर बाकायदा टाइम स्टाम्प भी लगता है। इसी तरह की प्रक्रिया उस सर्वर पर भी होती है जो ई-मेल रिसीव करता है। इस तरह आपका मेल आपके कम्प्यूटर तक पहुँचने से पहले उसकी जानकारी उस सर्वर पर भी रहती है जिससे आपका कम्प्यूटर जुड़ा है। |
| ई-मेल एड्रेस चोरी और अपने ई-मेल एड्रेस के गलत उपयोग को लेकर ऐसे में शंकाएँ उठना स्वाभाविक है। इन तमाम बातों के बीच यह बात भी उठती है कि किसी को ई-मेल करना कितना सुरक्षित है, क्या आपका ई-मेल कोई और भी पढ़ सकता है... |
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कैसे होती है ट्रेसिंग
किसी ई-मेल को ट्रेस करना ज्यादा मुश्किल नहीं होता है क्योंकि हर सर्वर और कम्प्यूटर का एक आईपी एड्रेस रहता है और जिसे ई-मेल प्राप्त होता है। उसे उसके पास भेजने वाले कम्प्यूटर और सर्वर का आईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल) एड्रेस हेडर के जरिए पहुँच जाता है।
इस आईपी एड्रेस के आधार पर आईएसपी (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) से यह जानकारी मिल जाती है कि ई-मेल कहाँ से किया गया है और इस आईपी नंबर के आधार पर संबंधित व्यक्ति तक पहुँचा जा सकता है। जो व्यक्ति सायबर कैफे चलाता है उसके यहाँ से अगर कोई ई-मेल करता है तो ई-मेल करने वाले का नाम और पता सायबर कैफे संचालित करने वाले के पास होना ही चाहिए और इस आधार पर उसे पकड़ा जा सकता है।
'दरअसल जैसे ही आप ई-मेल करते हैं तो सबसे पहले ई-मेल आउटगोइंग सर्वर पर जाता है और यहाँ से उस मेल पर बाकायदा टाइम स्टाम्प भी लगता है। इसी तरह की प्रक्रिया उस सर्वर पर भी होती है जो ई-मेल रिसीव करता है।'
बढ़ती ई-मेल एड्रेस की चोरीलोग आजकल ई-मेल एड्रेस और पासवर्ड चुराकर उसके जरिए किसी और को कैफे से गलत सूचनाएँ भेजने का काम करने लगे हैं। ऐसे व्यक्ति किसी भी ई-मेल एड्रेस का गलत तरीके से उपयोग कर सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि अपना ई-मेल एड्रेस और पासवर्ड सुरक्षित रखें। क्या होता है बड़े शहरों में सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ई-मेल करने के लिए सायबर कैफे की मदद लेते समय इस बात का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है कि जहाँ से ई-मेल किया जा रहा है, वह जगह विश्वसनीय है या नहीं। इसके पीछे का कारण यह है कि बड़े शहरों में सायबर कैफे पर ई-मेल एड्रेस और पासवर्ड चोरी कर लिए जाते हैं। यह की-लॉगर्स की मदद से किया जाता है। की-लॉगर्स और स्नीफर्स जैसी विधाओं की मदद से सायबर संचालक दिनभर में लॉग ऑन करने वाले लोगों के ई-मेल एड्रेस और पासवर्ड प्राप्त कर सकते हैं। बड़े शहरों में और इंदौर में भी इस तरह से लड़कियों के ई-मेल एड्रेस और पासवर्ड प्राप्त कर लिए जाते हैं और फिर यह ई-मेल एड्रेस और पासवर्ड बहुत से लोगों में बँट जाता है। इस तरह लड़कियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इसलिए लड़कियों को इस बात का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है कि वे ई-मेल करने से पहले साइबर कैफे की विश्वसनीयता जाँच लें। |
| लोग आजकल ई-मेल एड्रेस और पासवर्ड चुराकर उसके जरिए किसी और को कैफे से गलत सूचनाएँ भेजने का काम करने लगे हैं। ऐसे व्यक्ति किसी भी ई-मेल एड्रेस का गलत तरीके से उपयोग कर सकते हैं। |
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प्रोडक्ट मार्केटिंग के लिए बढ़ती ई-मेल आईडी की चोरी
ई-मेल का प्रयोग करने वाले इस बात को काफी अच्छी तरह से जानते हैं कि अक्सर उन्हें जंक मेल आते रहते हैं और इनमें विभिन्न उत्पादों के संबंध में जानकारी रहती है। आप आश्चर्य करते हैं कि दुनिया के दूसरे कोने में बैठे व्यक्ति को आपका ई-मेल आईडी कैसे पता लगा।
दरअसल ई-मेल अकाउंट खोलने वालों में से 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग इस बात से अनभिज्ञ रहते हैं कि उनकी मेल कहीं पढ़ी भी जा सकती है। यही कारण है कि दुनिया में कहीं भी किए गए मेल के स्थान को आसानी से पता लगाया जा सकता है।