आज के तकनीकी युग में हर ओर तकनीक का ही शोर है। छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति भी अब इंटरनेट पर सर्फिंग करने का शौक रखते हैं। एक जमाना हुआ करता था जब बच्चे मैदानों में अपने दोस्तों के साथ खेलने जाया करते थे या सारे दोस्त एक साथ बैठकर पढ़ाई किया करते थे लेकिन अब ये सारी बातें बहुत पुरानी हो चुकी हैं। अब सभी का एक ही विश्वसनीय साथी है इंटरनेट।आज से लगभग 10 साल पहले सिर्फ वही लोग इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताया करते थे जो किसी तकनीकी संस्था में कार्यरत थे, क्योंकि वह उनके काम का एक हिस्सा था। लेकिन अब इंटरनेट पर सर्फिंग करना समय बिताने का एक जरिया बन चुका है।जितनी तेजी से इस आदत ने लोगों के जीवन में अपनी जगह बनाई है उसी तेजी से इस आदत के दुष्परिणाम भी नजर आने लगे हैं। इस तरह की आदतें बहुत सी दिमागी तकलीफों के उत्पन्न होने का कारण बनती जा रही हैं।कुछ लोगों को इंटरनेट सर्फिंग की इतनी बुरी लत लग जाती है कि वे लोग दिन में 12 घंटे से ज्यादा सर्फिंग में ही बिता देते हैं। इससे उनके पूरे परिवार पर तो असर पड़ता ही है साथ ही वे धीरे-धीरे नेट एडिक्ट भी बन जाते हैं। इंटरनेट का उपयोग न कर पाने की स्थिति में वे अपने आप को असहाय महसूस करने लगते हैं।इंटरनेट एडिक्शन भी एक तरह का नशा ही है। लोग इसके इतने आदी हो जाते हैं कि किसी भी तरह इस नशे को पा लेना ही उनके जीवन का असली मकसद बन जाता है। इंटरनेट एडिक्शन के बहुत से लक्षण साफ दिखाई देते हैं जैसे-
* हमेशा सर्फिंग के बारे में सोचना।
* किसी जरूरी काम के लिए भी सर्फिंग छोड़ने का मन न होना।
* इंटरनेट का प्रयोग न कर पाने की स्थिति में मूड खराब हो जाना या किसी काम में मन न लगना।
* तनाव के समय सिर्फ इंटरनेट के साथ से ही खुश होना।
* परिवार वालों और दफ्तर में लोगों से झूठ बोलकर इंटरनेट सर्फ करने की आदत।
* इंटरनेट पर किसी से बात करते समय यह किसी वेबसाइट को देखते हुए अपनी भावनाओं पर नियंत्रण न रख पाना।
* इस आदत का व्यक्तिगत रिश्तों पर प्रभाव पड़ने से भी, आदत को न छोड़ना आदि।
इस एडिक्शन से मुक्ति पाने का एक कारगर तरीका है काउंसलिंग। इसके अलावा भी उन ट्रिगर्स का पता लगाया जा सकता है जिसकी वजह से यह परेशानी उत्पन्न हुई है। जिसके बाद इंटरनेट के प्रयोग को नियंत्रित किया जा सकता है। एक बार नियंत्रण में आने के बाद इस पर लगातार नजर बनाए रखना बहुत जरूरी है।