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गाँवों में पहुँचेगी वायरलैस क्रांति

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आईटी
भारत वाइमैक्स तकनीक अपनाने वाला 2012 तक दुनिया का सबसे बड़ा देश बन सकता है। इससे एक ओर जहाँ इस क्षेत्र में अपार संभावनाएँ विकसित होंगी, वहीं दूसरी ओर वायरलैस डिजिटल तकनीक के मामले में कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं। ग्रामीण एवं संपर्क रहित इलाकों को जोड़ने की इस योजना की सफलता का दारोमदार अब मंदी से जूझते बाजार पर है।

क्या है वाईमैक्स : वाइमैक्स के जरिए मीलों दूर से इंटरनेट या ब्रॉडबैंड कनेक्शन काम कर सकते हैं, यह वाई-फाई (वायरलेस इंटरनेट) टेक्नॉलॉजी के सीमित रेंज के मुक़ाबले बहुत अधिक कारगर मानी जाती है। वाइमैक्स वाई-फाई से इस मायने में अलग है कि उसका दायरा बहुत बड़ा है, उदाहरण के तौर पर वाई-फाई के जरिए हवाई-अड्डों, कार्यालयों और होटलों जैसे सीमित स्थानों में इंटरनेट की सुविधा दी जाती है। लेकिन वाइमैक्स के जरिए एक पूरे शहर या काफी बड़े क्षेत्र में इटंरनेट की सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आईसीटी आधारित किओस्क या कॉमन सर्विस सेंटर (सीएसटी) के माध्यम से भारत के ग्रामीण इलाकों को कनेक्ट करने के बाद वाइमैक्स तकनीक उन इलाकों में सूचनाएँ पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। इससे ऑनलाइन बिल भुगतान, कृषि उत्पादों की डिलिवरी, स्वास्थ्य सुविधाएँ, मनोरंजन सेवाएँ और ई-कॉमर्स से संबंधित गतिविधियों को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है। ई-कॉमर्स गतिविधियों में कमोडिटी की कीमतों से संबंधित सूचना, ऑनलाइन ट्रेडिंग एवं बैंकों से लेन-देन शामिल हैं।

भारत में वाइमैक्स तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की टेलिकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) आगे आई है। कंपनी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि उसकी योजना 2010 तक देश भर के 1,000 प्रखंडों में वाइमैक्स के लिए बेस स्टेशन बनाने की है। इससे कम से कम 25,000 गांवों को सीएससी सिस्टम के जरिए हाई स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराया जा सकेगा।

बीएसएनएल के आगामी कार्यक्रम में गांवों को पीसी, प्रिंटर, सॉफ्टवेयर और स्टाफ से लैस किया जाएगा जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कृषि से संबंधित सूचना के मामले में ई-प्रशासन की सेवा को आसान बनाया जा सकेगा। बीएसएनएल ने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में वाइमैक्स सेवा के विस्तार के लिए इंटेल के साथ समझौता किया है। समझौते के अनुसार बीएसएनएल द्वारा गाँव-गाँव तक वाइमैक्स सेवा पहुँचाने के लिए बनाए गए रोडमैप का इंटेल पुनरीक्षण करेगी और उसके लिए आधारभूत तकनीकी सुविधाएँ मुहैया कराएगी।

वाइमैक्स के विस्तार के मामले में निजी कंपनियां भी पीछे नहीं हैं। जानी-मानी कंपनी मोटोरोला ग्रामीण इलाकों में राज्य सरकार के लिए सघन ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्लूए) सुविधाओं का जाल बिछा रही है। नेटवर्क क्षेत्र की प्रमुख कंपनी अल्काटेल-ल्यूसेंट ने बीडब्लूए/वाईमैक्स समाधान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संयुक्त उपक्रम सी-डॉट (टेलिकॉम विभाग का अनुसंधान एवं विकास विभाग) का गठन किया है।

इसके अलावा, सबसे बड़ी चुनौती भारत में काफी जनसंख्या होने पर भी कंप्यूटर के कम घनत्व से संबंधित है। इस वजह से भी कंपनियाँ वाइमैक्स स्पेक्ट्रम की नीलामी पर भी नजर रखे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि बीडब्लूए/वाइमैक्स के लिए ब्रॉडबैंड का कम घनत्व होना एक वरदान की तरह है, पर इसकी शुरुआत के लिए जरूरी है सस्ते कम्प्यूटिंग प्लेटफॉर्म और सस्ते कंप्यूटर सर्वसुलभ होने चाहिए।

ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड की अपार संभावनाओं को देखते हुए कई और कंपनियों भी इस क्षेत्र में कूदने के लिए तैयार हैं। इन इलाकों के लिए कई कंपनियाँ कम लागत वाले निवेश के लिए अपेक्षाकृत 70 फीसदी सस्ता और रेडी टु यूज बेस स्टेशन बना रही हैं। इन प्रयासो से आने वाले दिनों में लगता है कि अब तक बिजली के लिए तरस रहे दूर-दराज के गाँवो में बिजली से पहले शायद वायरलैस जरूर पहुँच जाएगा।

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