गरिमा माहेश्वरी
आपने इंटरनेट का प्रयोग करते समय या किसी और से सुना होगा कि वेब ब्राउज़र नहीं खुल (ओपन) रहा या फिर सर्वर नहीं चल रहा। लेकिन कभी सोचा है कि आखिर ये वेब ब्राउज़र और सर्वर हैं क्या? आजकल इंटरनेट के बढ़ते प्रचलन की वजह से हर उम्र के लोग अपने काफी कामों के लिए इस पर निर्भर हैं। आपको जब भी इंटरनेट पर अपनी पसंदीदा वेब साइट खोलनी होती है, तब आप एक सॉफ्टवेयर की मदद से एक पेज खोलते हैं, जिस पर आप उस वेब साइट का एड्रैस लिखते हैं। यह सॉफ्टवेयर वेब ब्राउज़र कहलाता है और वेब साइट का जो एड्रैस आप लिखते हैं उसे यूआरएल कहते हैं।वेब ब्राउज़र एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता वेब साइट पर उपलब्ध जानकारी का लाभ उठा सकते हैं। वेब साइट बहुत से वेब पेजों को मिलाकर बनती है। जो जानकारी वेब साइट पर हमें दिखती है वह दरअसल वेब पेज पर ही उपलब्ध होती है। यह ‘वेब साइट’ वर्ल्ड वाइड वेब (www) पर या फिर लोकल एरिया नेटवर्क के ज़रिए उपलब्ध होती है।कई बार आपने यह देखा होगा कि जब आप किसी इमेज पर या फिर किसी टेक्स्ट पर क्लिक करते हैं तो एक नया पेज खुल जाता है। इस टेक्स्ट या फिर इमेज को हाइपर लिंक कहा जाता है। यह लिंक अगर टेक्स्ट है तो ज़्यादातर यह नीले रंग की दिखाई देती है पर यह ज़रूरी नहीं कि हर नीला टेक्स्ट हाइपरलिंक ही हो।वेब ब्राउज़र के कुछ प्रचलित नामों में शामिल हैं - मोज़िला फायरफोक्स, इंटरनेट एक्सप्लोरर, एओएल आदि। वेब ब्राउज़र पहली बार 1980 में अस्तित्व में आया था। 1991 में टिम बर्नर-ली ने डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू नामक ब्राउज़र बनाया जिसने बहुत सी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर तकनीकों को साथ में लाकर खड़ा कर दिया। वेब ब्राउज़र जो वेब साइट आपके लिए खोलता है वह जानकारी, ब्राउज़र एक वेब सर्वर से लेता है। जब किसी वेब पेज को आप पहली बार अपने कम्प्यूटर पर देखना चाहते हैं तो उस पेज को खुलने में थोड़ा सा समय लगता है। वहीं दूसरी ओर जिस पेज को आप अक्सर अपने कम्प्यूटर पर खोलते हैं वह जल्दी खुल जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योकि वह पेज आपके कम्प्यूटर कि कैश मेमोरी में स्टोर हो जाता है और उसके लिए ब्राउज़र को सर्वर से संपर्क नहीं करना पड़ता है। इसका मतलब यह हुआ कि कैश मेमोरी उन सभी वेब पेजों को स्टोर करके रखती है जिन्हें आप अक्सर देखते हैं। |
| यह ब्राउज़र इंटरनेट पर उपलब्ध सारी जानकारी बड़ी ही आसानी से मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन पर डिस्प्ले कर देता है। मोबाइल ब्राउज़र के सॉफ्टवेयर को बहुत छोटा और सक्षम बनाया जाता है ताकि इसकी वजह से.... |
|
|
यह तो हुई कम्प्यूटर की बात, वेब ब्राउज़र तो आजकल आपके मोबाइल या पीडीए पर भी उपलब्ध होते हैं। आपको अपने मोबाइल पर इंटरनेट की उपयोग करने की सुविधा ये वेब ब्राउज़र प्रदान करते हैं। मोबाइल पर उपलब्ध वेब ब्राउज़र को मोबाइल ब्राउज़र या माइक्रो ब्राउज़र भी कहा जाता है। माइक्रो ब्राउज़र कम्प्यूटर पर उपलब्ध ब्राउज़र से ज़्यादा अलग नहीं होते पर इनको बनाते समय यह ध्यान रखा जाता है कि इनका उपयोग मोबाइल पर होना है और इसलिए इनकी डिज़ाइन सरल और मेमोरी यूसेज कम रखा जाता है।
यह ब्राउज़र इंटरनेट पर उपलब्ध सारी जानकारी बड़ी ही आसानी से मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन पर डिस्प्ले कर देता है। मोबाइल ब्राउज़र के सॉफ्टवेयर को बहुत छोटा और सक्षम बनाया जाता है ताकि इसकी वजह से मोबाइल के अन्य सॉफ्टवेयरों में कोई परेशानी न आए। इसकी कार्यप्रणाली ऐसी होती है जो कम मेमोरी में भी ब्राउज़र को अपना काम निपुणता से करने में मदद करती है।