पेन ड्राइव में समा गया है कंप्यूटर
- राजीव शर्मा
आप अपने काम की कंप्यूटर फाइलें, डाटा वगैरह पेन ड्राइव में यह सोचकर रखते हैं कि जरूरत पड़ने पर उनका कहीं भी इस्तेमाल किया जा सके लेकिन यह तो जरूरी नहीं कि हर कंप्यूटर में वे सब प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर लोड हों जिन पर आप काम करते हैं। फिर? चिंता न करें। अब इस समस्या का हल भी पेन ड्राइव में ही मौजूद है। ऐसी दिक्कतों को देखते हुए ही आजकल ऐसे प्रोग्राम उपलब्ध होने लगे हैं जिनके इस्तेमाल के लिए उन्हें कंप्यूटर में इंस्टॉल या लोड करने की जरूरत नहीं होती। ये सभी प्रोग्राम आपके पेन ड्राइव में ही रहते हैं और वहीं से फाइलों को खोलकर आपकी सेवा में प्रस्तुत कर देते हैं। असल में, ये ऐसे प्रोग्राम होते हैं जिन्हें अन्य साधारण प्रोग्राम की तरह कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में लोड करने की जरूरत नहीं होती। ये पेन ड्राइव से सीधे कंप्यूटर मेमोरी में लोड हो जाते हैं। यही इनकी वह खासियत है जो इन्हें खास बना देती है।सीधे पेन ड्राइव पर चलने वाले ये सॉफ्टवेयर 'स्टीक-एप्लिकेशन' या 'पोर्टेबल-सॉफ्टवेयर' कहलाते हैं। इनका उपयोग करते समय कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम की रजिस्ट्री या कहें कि उसकी हार्ड डिस्क में डाटा सेव नहीं होता। इस प्रकार, कंप्यूटर इस्तेमाल किए जाने के बावजूद पूरी तरह पहले जैसा ही रहता है। इन पोर्टेबल-सॉफ्टवेयर की सुविधाओं को देखते हुए इनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि अब पेन ड्राइव के लिए म्यूजिक प्लेयर, वेब-ब्राउजर, कंप्यूटर गेम, सिक्योरिटी-रिकवरी सॉफ्टवेयर, वर्ड प्रोसेसर, फोटो एडिटर जैसे सभी तरह के सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं।ऊँगली में ही लगवा लिया पेन ड्राइव : अब इसे दीवानगी कहिए या बुद्धिमानी, फिनलैंड के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर जेरी जालवा ने अपनी ऊँगली में ही पेन ड्राइव लगवा रखा है। पिछले साल जुलाई में हुई एक बाइक दुर्घटना में उन्हें अपने उलटे हाथ की आधी अनामिका गंवानी पड़ गई। एक दिन इलाज के दौरान डॉक्टरों ने मजाक करते हुए उन्हें यह सुझाव दे दिया कि वे अपनी कृत्रिम ऊँगली में पेन ड्राइव लगवा लें। जेरी को यह सुझाव पसंद आ गया और उन्होंने इस पर अमल कर डाला। अब उनकी उंगली में 2 जीबी का एक पेन ड्राइव रहता है। जेरी को जब भी इसकी जरूरत होती है वे अपनी ऊँगली कंप्यूटर के यूएसबी पोर्ट में घुसा देते हैं। उनकी यह उंगली आम कृत्रिम ऊँगली जैसी ही दिखती है जिसे वे जब चाहे, अलग कर सकते हैं। इस 'ऊँगली' में जेरी फोटो, फिल्म, गाने, सॉफ्टवेयर आदि का डेटाबेस रखते हैं। इसके तमाम फायदे देखते हुए आजकल जेरी इसे और ज्यादा अपग्रेड करने की सोच रहे है। उनके दोस्त उनसे हँसी-मजाक करते हुए कहते हैं यार तुम्हारे पास 'थंब ड्राइव' नहीं बल्कि 'फिंगर ड्राइव' है।ऑपरेटिंग सिस्टम अब पेन ड्राइव में : वक्त की नजाकत और लोगों की जरूरतों को देखते हुए इन कंप्यूटरों में अब ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाने लगी है जिससे उन्हें किसी यूएसबी पोर्ट के जरिए सीधे पेन ड्राइव से ही बूट करवाया जा सके। वैसे तो पूरा कंप्यूटर किसी ऑपरेटिंग सिस्टम से ही चलता व नियंत्रित होता है जैसे विंडोज-98, विंडोज-एक्सपी, लाइनक्स, यूनिक्स आदि लेकिन इन्हें कंप्यूटर में इंस्टॉल करने के लिए कंप्यूटर को पहले किसी बूटेबल फ्लॉपी या सीडी की मदद से बूट करवाया जाता है। इसके बाद ही ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर में लोड किया जाता है। पर अब बूटिंग का काम भी पेन ड्राइव करने लगे हैं। यही नहीं, बल्कि अब तो पूरा का पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम ही इनमें समाने लगा है। इसका एक फायदा यह भी है कि आमतौर पर लोग अपने कंप्यूटर को अपनी पसंद के अनुसार व्यवस्थित करके रखते हैं जैसे उसका थीम, वॉलपेपर, प्रोग्राम सेटिंग, डेस्कटॉप सेटिंग आदि। इस तरह पेन ड्राइव में पड़ा आपका सिस्टम पूरी तरह से आपका होता है इसलिए नए कंप्यूटर पर काम करने के बावजूद आप हर बार अपने' ही कंप्यूटर पर काम कर रहे होते हैं। गोपनीय, सैन्य, शोध या इसी तरह का कोई महत्वपूर्ण कार्य करने वाले लोगों के लिए तो ये बहुत ही उपयोगी होते हैं, क्योंकि इनके लिए अपने पेन ड्राइव के सॉफ्टवेयर पर काम करना ही सुरक्षित रहता है।