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फिर हाथ आजमाते सायबर क्रिमिनल

पुरानी चालें, नए तरीके!

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सायबर क्रिमिनल
गरिमा माहेश्वरी
WDWD
सर्दियाँ शुरू होने से पहले ही लोग आने वाली छुट्टियाँ बिताने की योजनाएँ बनाने लगते हैं, मसलन क्रिसमस कहाँ मनाएँगे? .... शॉपिंग कहाँ से करनी है? आदि। अब जब सभी के पास क्रेडिट कार्ड होते हैं और शॉपिंग ऑनलाइन भ‍ी आराम से हो जाती है तो छुट्टियों के दौरान किसी बात की चिंता ही कहाँ बचती है।

लेकिन बढ़ते सायबर क्राइम के चलते थोड़ा सावधान रहना भी जरूरी है। हालाँकि छुट्टियों के मौसम को देखते हुए बहुत से कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाते लेकिन सायबर क्रिमिनल भी अपनी पुरानी तरकीबों को नए अंदाज में आजमाने से पीछे कहाँ हटते हैं।

ई-कॉमर्स कंपनियाँ वैसे तो इन क्रिमिनल्स की बहुत सी चालों से वाकिफ होंगी और उसी के मुताबिक सुरक्षा इंतजाम भी होंगे लेकिन अगर यही चालें नए तरीके से अपनाई जा रही हों तो कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों का भी भारी नुकसान हो सकता है।

क्या हैं पुरानी चालें:

यह बात तो साफ है कि क्रिमिनल्स का काम है हमें धोखे में रखकर, उनका काम पूरा करने का! जैसे-जैसे ये क्रिमिनल नए तरीके अपनाते हैं, हम नए सुरक्षा इंतजामों से इन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन ये लोग फिर इस सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश में जुट जाते हैं। इन छुट्टियों में भी ये क्रिमिनल्स नए तरीकों और चालों से पुराने सुरक्षा इंतजामों को तोड़ने की भरपूर कोशिश कर सकते हैं।

सायबर क्राइम के कुछ पुराने तरीके :

धोखे से उत्पादों को अपने पते पर पहुँचाना:

सायबर क्रिमिनल्स के लिए यह तरीका सबसे आसान होता है। उन्हें बस ग्राहक द्वारा ऑर्डर किए हुए सामान का ऑर्डर नम्बर पता करना होता है जिसके सहारे वे सामान की डिलीवरी किसी नए पते पर करवा सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, ग्राहक के पास सामान न पहुँचने पर, संबंधित कंपनी को एक बार फिर वही सामान ग्राहक तक पहुँचाना पड़ता है। इस तरह एक की कीमत में कंपनी को दो उत्पाद भेजने पड़ते हैं जिससे कंपनी को नुकसान का सामना करना पड़ता है।

इसी तरह कई बार क्रिमिनल्स क्रेडिट कार्ड की सहायता से भी ऑनलाइन सामान खरीद सकते हैं। इस तरह की खरीद में उन्हें पकड़े जाने का खतरा कम होता है क्योंकि वे कार्ड में लिखी सारी सही जानकारी का प्रयोग करते हैं। इसके बाद संबंधित कंपनी के कर्मचारी बन, वे क्रेडिट कार्ड धारक को यह कहते हैं कि यह डिलीवरी गलती से उनके पते पर पहुँच गई है और वे जल्द से जल्द सामान वहाँ से ले जाएँगे। इस तरह वे सारे सुरक्षा इंतजामों से बच भी जाते हैं और अपने मकसद में कामयाब भी हो जाते हैं।

फिशिंग की भी ले सकते हैं मदद :
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जितनी तेजी से कंपनियों का एक दूसरे के साथ जुड़कर काम करने का सिलसिला बढ़ा है, फिशिंग ने भी क्रिमिनल्स के बीच उतनी ही तेज़ी से जगह बना ली है। क्रिमिनल्स ग्राहकों को कंपनी की ओर से एक ईमेल भेज उन्हें किसी दूसरी वेबसाइट पर डाइवर्ट कर देते हैं। इस साइट पर जब ग्राहक अपनी जानकारी हाल देते हैं, तो ग्राहकों को एक एरर मैसेज की मदद से यह जताया जाता है कि उनकी जानकारी स्टोर नहीं हो पाई है और इसलिए पेमेंट नहीं हो सकता। इस तरीके की मदद से क्रिमिनल्स के पास ग्राहक की सारी गोपनीय जानकारियाँ पहुँच जाती हैं जिनका वो आसानी से उपयोग कर सकता है।

ईकार्ड भी हैं एक विकल्प :

जैसे-जैसे लोगों ने कार्ड्‍स ऑनलाइन खरीदने शुरू किए क्रिमिनल्स ने एक और कमाई का जरिया ढूँढ़ लिया। आपके क्रेडिट कार्ड की जानकारी पाने के बाद ये लोग बहुत से कार्ड खरीद किसी ऑक्शन साइट पर इन्हें बेच देते हैं जिससे इनकी अच्छी खासी कमाई हो जाती है।

इन नए तरीकों के लिए, नए सुरक्षा इंतजामों की सेना तैयार करना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही जरूरी है एक स्टैंडर्ड चेकिंग सिस्टम का उपयोग करना, जो समय-समय पर ग्राहकों की जानकारियों और उनके द्वारा खरीदे गए उत्पादों, सामान पहुँचाने के पते आदि को जाँचता रहे।

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