फिशिंग के नए खतरे
स्मिशिंग से भेजे जाएँगे स्पैम एसएमएस
फिशिंग घोटालों में फिर से बढ़ोतरी की खबरें आ रहीं है, इस बार लोगों को नाइजेरिया के राजकुमार के जाली ईमेल मिल रहे हैं जिसमें लोगों को पैसे का लोभ देकर उनके अकाउंट नंबर मांगे जा रहे हैं। अधिकारी जितना इन घोटालों का पता लगाते हैं स्पैमर्स या फिशर्स धोखेबाजी के उतने ही स्मार्ट तरीके इजाद कर रहे हैं। इंटरनेट पर रोज आने वाली मेल्स में बड़ी संख्या में स्पैम मेल होते हैं। कपटपूर्ण संदेश अज्ञात प्रतिशत में हैं और इनसे इंटरनेट के ये ठग खूब लाभ कमा रहे हैं।
फिशिंग सामान्यत: ऐसे ईमेल होते हैं जो विश्वनीय स्रोतों जैसे बैंक इत्यादि से भेजे जाते हैं जिससे प्राप्तकर्ता की बैक खाते या क्रेडिट कार्ड से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सके। स्पैम घोटालों के मामले में यूएस सरकार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी थी जब उसने मैककोलो कॉर्पोरेशन नाम की कंपनी की वेबसाइट को बंद किया था। बताया जाता है कि उस समय विश्वभर में भेजे गए स्पैम ईमेल में से 75 प्रतिशत इस वेबसाइट से भेजे गए थे।
गूगल के एक अधिकारी के अनुसार अब स्पैमर्स अपनी पहचान को छुपाने के लिए स्पैम भेजने में विभिन्न प्रकार के कंप्यूटरों का इस्तेमाल करते हैं। मतलब अब स्पैमर्स मैककोलो जैसे तरीको का इस्तेमाल नहीं करेंगे। जैसे ही आप किसी स्थानीय आपदा पर चर्चा कराने वाली वेबसाइट पर जाते हैं और उसका कोई वीडियो डाउनलोड करते हैं तो उस वीडियो के साथ ही आपके कंप्यूटर पर एक वायरस भी डाउनलोड हो जाता है।
माइक्रोसॉफ्ट के सायबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने बताया है कि यह पता लगाने का कोई तरीका नहीं है कि ऐसे स्पैम संदेश भेजकर कितना पैसा चुराया गया है क्योंकि स्पैम के शिकार यूजर्स की संख्या बहुत अधिक है। आजकल स्पैमर्स चोरी की नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसका नाम है 'स्मिशिंग'। यह ऐसी तकनीक है जिसमें एसएमएस के जरिए स्पैम संदेश भेजे जाते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें स्पैम मेल के प्राप्तकर्ता अपने पैसे को मालवेयर और खतरनाक सॉफ्टवेयर के उपयोग में लगा देते हैं जो चोरों के लिए पासवर्ड और क्रेडिट कार्ड नंबर चुराते हैं। इस जानकारी को बाद में अंडरग्राउंड मार्केट में बेचा जाता है। खरीदने वाले इस जानकारी का उपयोग खरीदी करने और और जाली पहचान बनाने में करते हैं। ज्यादातर घोटालें अपनी डिजिटल विशेषज्ञता को मापने के लिए किए जाते हैं।
यूनाइटेड किंगडम, तुर्की और जर्मनी में काम कर रहे फडरल ब्यूरो ऑफ इंविस्टिगेशन ने अक्टूबर 2008 में डार्क मार्केट नाम के एक स्पैम फोरम को उस समय बंद किया था जब उसके पास 2500 पंजीकृत संदस्य थे। जानकारों का मानना है कि स्पैम के खतरे को पूरी तरह से खत्म होने में समय लगेगा।