मिशन एडमिशन : आईटी ने ढूँढा समाधान
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शैलेश मेहता
सभी माता-पिता अपने बच्चों का अच्छे स्कूलों में एडमिशन कराना चाहते हैं और शायद ही ऐसा कोई बच्चा होगा जिसके मन में अच्छे स्कूल में पढ़ने की इच्छा ना हो। लेकिन सभी की सारी इच्छाएँ पूरी हो जाएँ ,आज की शिक्षा प्रणाली ऐसा कोई वादा करती दिखाई नहीं देती। शायद यही वो कारण है जिसकी वजह से बच्चे और उनके अभिभावक दोनों ही परेशानी का सामना कर रहे हैं।इन परेशानियों का एक कारण यह भी हो सकता है कि आजकल एडमिशन देते समय स्कूल और कॉलेजों में मेरिट प्राप्त छात्रों को दरकिनार कर दिया जाता है । एडमिशन के लिए कई नए तरीकों को अपनाया जाता है, जो छात्रों और उनके पालको को भयभीत करने के लिए काफी होते हैं। उदाहरण के लिए कॉलेजों में कई तरह की आरक्षित सीटों का होना जो कि केवल आरक्षण प्राप्त छात्रों के लिए ही होती हैं। ऐसे में कुछ काबिल मेरिट प्राप्त छात्र पीछे छूटते चले जाते हैं। कुछ छात्र जो विदेश जाकर पढ़ने में सक्षम होते हैं वे वहाँ का रूख कर लेते हैं । यह देश के लिए एक बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। बढ़ती तकनीक के साथ ही कई ऐसे विकल्प सामने आए हैं जो इन परेशानियों को खत्म करने का एक सफल उपाय हैं।ऐसी ही एक तकनीक है ई-लर्निंग। ई-लर्निंग एक ऐसे विकल्प के रूप में सामने आई है जिसकी सफलता को नकारा नहीं जा सकता। अमरीका में ऐसे कई छात्र हैं जिन्होंने प्रतिदिन स्कूल जाने की जगह ई-लर्निंग को अपनाया है।
ई-लर्निंग के माध्यम डिस्कशन बोर्ड ,चैटिंग या लाईव वर्चुअल क्लास रूम(एल वी सी) हो सकते हैं। एल वी सी एक ऐसा माध्यम है जिसके माध्यम से कई ऐसे शिक्षकों के द्वारा पढ़ा जा सकता है जिनका हर स्कूल में पढ़ाना मुमकिन नहीं। ई-लर्निंग के लिए शिक्षकों का एक ऐसा समूह बनाया जाता है जिसमें कई जगहों के शिक्षक शामिल होते हैं।
ई-लर्निंग की मदद से सैंकड़ों छात्रों को उम्दा शिक्षा प्रदान की जा सकती है।स्कूल और कॉलेजों को ई-लर्निंग की शुरूआत करने के लिए एक ई-लर्निंग सेंटर खोलना होगा,एक ई-लर्निंग पोर्टल बनाकर उस पर उपयुक्त जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
ई-लर्निंग के माध्यम से पढ़ने वाले छात्र परीक्षा भी ऑनलाईन ही दे सकते हैं। ई-लर्निंग सिर्फ एक ऐसा माध्यम उपलब्ध कराता है जहाँ सीट और जगह की कमी शिक्षा प्राप्त करने में बाधा नहीं बनती। भारत इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से ग्रामीण अंचलों में साक्षरता अभियान तेजी से चला सकता है। हम उम्मीद करें कि वह सुबह कभी तो आएगी ...!