It Learning %e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b2 %e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0 %e0%a4%b8%e0%a5%87 %e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%af%e0%a4%be %e0%a4%95%e0%a5%8b %e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be 109061900100_1.htm

Festival Posters

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

मोबाइल टावर से गौरेया को खतरा

Advertiesment
आईटी
-एन मुरलीधरन

तिरूवनंतपुरम, भाषा। एक नए अध्ययन के मुताबिक आमतौर पर हमारे घरों के आसपास अपना घोंसला बनाकर रहने और चहकने वाली नन्हीं गौरैया को मोबाइल फोन के टावर से खतरा पैदा हो गया है।

केरल के कोल्लम ताल्लुक में पर्यावरण संगठन केरल पर्यावरण अध्ययनकर्ता एसोसिएशन ने दावा किया है कि गौरैया की संख्या में रेलवे स्टेशनों गोदामों और मानव बस्तियों में कमी हो रही है। अध्ययन में बताया गया है कि गौरैया के अंडे से बच्चे के बाहर आने में 10 से 14 दिनों का समय लगता है लेकिन टावरों के नजदीक स्थित इनके घोंसले में मौजूद अंडों के कवच 30 दिन बाद भी नहीं टूट सके।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि मोबाइल टावरों से बहुत कम तीव्रता 900 से 800 मेगाहार्ट्ज से इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगे निकलती हैं। हालांकि यह उनके अंडो के पतले कवच को तोड़ने के लिये काफी है।

इस अध्ययन दल का नेतृत्व करने वाले प्रो जैनुद्दीन पत्ताझी ने बताया कि अध्ययन में पाया गया मोबाइल फोन टावरों की बेतहाशा और अवैज्ञानिक तौर पर बढ़ोतरी से गौरैया की संख्या में कमी आ रही है। उन्होंने पीटीआई को बताया कि मोबाइल फोन टावर लगाने के बारे में फौरन कड़े नियम कानूनों को लागू कर गौरैया को बचाने की जरूरत है।

यह पक्षी चूंकि बीज अनाज और कीटों को खाती है इसलिए शीशा रहित पेट्रोल के इस्तेमाल से निकलने वाली मिथेल नाइट्रेट जैसी जहरीली गैसों और बागवानी में इस्तेमाल किये जाने वाले कीटनाशकों की वजह से इन्हें नुकसान पहुँच रहा है।

गौरतलब है कि गौरेया की औसत उम्र 13 साल होती है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi