सीडीएमए यानी कोड डिवीजन मल्टीपल एक्सेस, सेल्युलर तकनीक का ही एक रूप है जिसे आईएस-95 कहा जाता है। यह जीएसएम तकनीक की प्रबल प्रतिद्वंद्वी मानी जाती है। मूलतः इस तकनीक को सीडीएमए-1 कहा जाता है।
क्वालकोम द्वारा विकसित सीडीएमए की मुख्य विषेशता यह है कि इसमें उधा क्षमता व लघु सेल रेडियस पर स्प्रेड-स्पेक्ट्रम तकनीक से विशेष कोडिंग स्कीम की होती है। वाइड बैंड पर यह तकनीक यूएमटीएस 3-जी नेटवर्क के रूप में कार्य करती है।
सीडीएमए टेलीकम्युनिकेशन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (टीआईए) द्वारा 1993 में स्वीकार की गई थी। सबसे पहले 1995 में इसका व्यवसायीकरण होने के बाद 1998 तक सीडीएमए-1 के उपभोक्ताओं का आँकड़ा 16 मिलियन तक पहुँच गया था। मई 2001 तक यह आँकड़ा 35 मिलियन था और 2004 में विश्वभर में अनुमानित 60 मिलियन उपभोक्ता इस तकनीक का लाभ उठा रहे हैं।
लगभग 35 देशों मे सीडीएमए का व्यवसायीकरण हो चुका है या इस पर परीक्षण चल रहे हैं और 22 देशो में 43 वायरलेस इन लोकल लूप सिस्टम सफलतापूर्वक सीडीएमए-1तकनीक पर चल रहे हैं। वर्तमान में उपलब्ध डेटा गति को 1एक्स आरटीटी सीडीएमए की नई तकनीक पर 300 केबीपीएसतक प्रदान करना ही सीडीएमए-1 का अगला कदम है, साथ ही मोबाइल उपकरण की बैटरी भी ज्यादा देर चले, इस हेतु भी प्रावधान किया गया है।
विश्वभर में सीडीएमए की तीसरी पीढ़ी तकनीक जैसे मल्टी-कैरियर (1.25 मेगाहर्ट्ज बैंडविड्थ पर 2000 1एक्स एमसी और एचडीआर), 3एक्स एमसी 5 मेगाहर्ट्ज बैंडविड्थ तथा डायरेक्ट स्पीड (डब्ल्यूसीडीएमए 5 मेगाहर्ट्ज बैंडविड्थ) पर कार्य चल रहा है।
क्वालकोम द्वारा सीडीएमए व संबंधित तकनीकों का पेटेंट करवाया गया है जिसके माध्यम से क्वालकोम को करीब 75 उत्पादकों से तकनीकी हस्तांतरण पर लायसेंसिंग शुल्क व रॉयल्टी आय प्राप्त होती है। साथ ही क्वालकोम इन कम्पनियों को सीडीएमए तकनीक स्थापित करने में भी मदद करती है।
क्वालकोम के 3-जी लायसेंसिंग अनुबंध नियमों के अंतर्गत कई कम्पनियाँ तीसरी पीढ़ी के इन अनुप्रयोगों को अपना रही हैं जिनमें प्रमुख रूप से डब्ल्यूसीडीएमए, टीएससीडीएमए, 1एक्स और हाई डेटा रेट (एचआरडी) हैं। इसी रॉयल्टी व लायसेंसिंग से क्वालकोम को वर्तमान मे सीडीएमए तकनीक का विकास, मोबाइल उपकरण व परीक्षण उपकरणों को निरंतर विकसित करने की क्षमता मिलती है।