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2007 का आईटी उद्योग

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आईटी उद्योग 2007
रुपए की कीमत में इजाफे का असर आईटी उद्योग पर इस कदर पड़ा कि इन्फोसिस जैसी दिग्गज कंपनी ने भी शेयर बाजार में अपनी चमक खो दी। आम निवेशकों ने आईटी कंपनियों के शेयरों की तरफ तो देखना ही बंद कर दिया है।

इससे घबराये आईटी उद्योग ने सबसे पहले तो अगले वर्ष के लिए उपाय करने शुरू किए। इसमें सबसे बड़ा उपाय वित्त संचय करना था क्योंकि रुपये की कीमत इस वर्ष 12 प्रतिशत बढी और कंपनियां उसके लिए तैयार नहीं थीं। इसलिए नामचीन कंपनियों ने अगले वर्ष के लिए पहले ही तैयारी कर ली।

इसके अलावा मंझोली कंपनियों ने अहतियात बरतते हुए अपने विदेशी ग्राहकों की संख्या में काफी कटौती की। उन्होंने घरेलू ग्राहकों पर अधिक ध्यान दिया क्योंकि उनसे भुगतान भी रुपए में ही मिलता है।

रुपए ने आईटी की सेहत तो बिगाडी लेकिन इसकी वजह से दूसरी गतिविधियाँ नहीं रुकीं। भारतीय आईटी उद्योग का अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण भी इसी वर्ष हुआ। अजीम प्रेमजी की कंपनी विप्रो ने अमरीका में न्यूजर्सी की कंपनी इन्फोक्रासिंग का अधिग्रहण इसी वर्ष किया और उसके लिए कंपनी ने 60 करोड़ डालर खर्च किए हैं।

विप्रो ने भले ही साल का सबसे बडा सौदा किया लेकिन इन्फोसिस ने सतर्कता दिखाते हुए इस साल सौदों से परहेज ही किया। उसने केवल एक सौदा किया जिसके तहत कंपनी ने फिलिप्स इलेक्ट्रानिक्स को 2.8 करोड़ डॉलर में खरीदा, लेकिन इन्फोसिस के पिटारे में अगले साल के लिए कई सौदे हैं। अगले वर्ष कंपनी करीब 15 अधिग्रहण करने वाली है जिन पर वह लगभग 150 करोड़ डॉलर खर्च करेगी।

अधिग्रहण के अलावा भी आईटी उद्योग को इस वर्ष उपलब्धियाँ हासिल हुईं। अग्रणी साफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने इस वर्ष एशिया का सबसे तेज सुपर कंप्यूटर विकसित किया। यह दुनिया का चौथा सबसे तेज सुपर कंप्यूटर है।

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