Publish Date: Wed, 28 Nov 2007 (11:56 IST)
Updated Date: Wed, 28 Nov 2007 (11:55 IST)
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) तथा एयरटेल ने नंबर पोर्टेबिलिटी के बारे में सरकार के कदम का स्वागत किया है।
इन कंपनियों का कहना है कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि इसे एक साथ पूरे देश में शुरू किया जाना चाहिए। संगठन ने इसे फिक्स लाइन पर भी लागू करने की वकालत की है।
दूरसंचार विभाग की तकनीकी इकाई टेलीकॉम इंजीनियरिंग सेन्टर (टीईसी) ने स्पेक्ट्रम आबंटन के मसले पर इस माह के शुरू में अपनी रिपोर्ट दे दी थी। उसने रेडियो तरंगों के आबंटन के लिए उपभोक्ताओं की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी की सिफारिश की है। राजा ने उसकी रिपोर्ट को सिद्धांत रूप में स्वीकार कर लिया था लेकिन भारती एयरटेल, वोडाफोन एस्सार और आइडिया सेल्युलर जैसे जीएसएम ऑपरेटरों के इस पर कड़ा विरोध व्यक्त करने पर सरकार ने नियमों पर नए सिरे से विचार करने के लिए एक पैनल गठित कर दिया।
पैनल को इसी महीने अपनी रिपोर्ट देनी है। पैनल में बीएसएनएल और एमटीएनएल को शामिल नहीं किया गया है लेकिन इसमें जीएसएम और सीडीएमए के प्रतिनिधि शामिल हैं। पैनल की बैठक 26 और 30 नवम्बर को प्रस्तावित है।
दूरसंचार से जुडे एक अन्य मामले में सरकार ने दूरसंचार विवाद निपटारा न्यायाधिकरण (टीडीसैट) के समक्ष यह स्पष्ट किया है कि दोहरी तकनीक की अनुमति देना नीतिगत फैसला है और जीएसएम आपरेटरों के पास इसे चुनौती देने का अधिकार नहीं है।