Publish Date: Sat, 16 Aug 2025 (09:12 IST)
Updated Date: Sat, 16 Aug 2025 (09:34 IST)
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को शून्य काल में मनाई जाती है, लेकिन जन्माष्टमी मनाए जाने को लेकर लोगों में भ्रम है कि यह त्योहार कब मनाएं। 15 अगस्त को मनाएं या कि 16 अगस्त को, क्योंकि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की तिथि दोनों दिन ही पड़ रही है। कुछ ज्योतिष 15 को और कुछ 16 को बता रहे हैं। ऐसे में जानिए कि सही डेट क्या है।
अष्टमी तिथि प्रारम्भ- 15 अगस्त 2025 को रात्रि 11:49 बजे।
अष्टमी तिथि समाप्त- 16 अगस्त 2025 को रात्रि 09:34 बजे।
15 अगस्त का समर्थन करने वाले ज्योतिष: इस तारीख का समर्थन करने वालों का कहना है कि श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि के दिन मध्यरात्रि में शून्य काल के समय हुआ था। इसे निशीथ काल भी कहते हैं। यह समय 15 अगस्त की रात्रि को ही रहेगा 16 अगस्त को नहीं। इसलिए 15 अगस्त की रात्रि को जन्माष्टमी मनाना चाहिए। स्मार्त मत में इसी दिन जन्माष्टमी मनाएंगे। शास्त्रानुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में 12 बजे हुआ था। अत: जिस दिन यह सभी संयोग बने उसी दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाना श्रेयस्कर है। स्मार्त मत से अष्टमी 15 अगस्त को रहेगी। हालांकि 15 और 16 अगस्त दोनों ही दिन रोहिणी नक्षत्र नहीं रहेगा।
15 अगस्त निशिथ पूजा का समय- मध्यरात्रि 12:04 से 12:47 तक।
16 अगस्त का समर्थन करने वाले ज्योतिष: 15 अगस्त को तिथि मध्यरात्रि से ही प्रारंभ हो रही है जबकि श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि के मध्यकाल में हुआ था। अष्टमी दोनों दिन आधी रात को व्याप्त हो तो जन्माष्टमी व्रत और पूजा दूसरे दिन किया जाता है। इस मान से उदयातिथि की अष्टमी ही मान्य है। इस व्रत में अष्टमी के उपवास और पूजन के बाद नवमी के पारणा से व्रत की पूर्ति होती है। यानी पारण 17 तारीख को सुबह होगा। इसलिए 16 अगस्त को अष्टमी मान्य है। वैष्णव मत से अष्टमी 16 अगस्त को रहेगी।
निष्कर्ष: शास्त्रानुसार अर्द्धरात्रि में रहने वाली तिथि अधिक मान्य होती है किन्तु शास्त्रीय सिद्धांत अनुसार अष्टमी यदि सप्तमी विद्धा (संयुक्त) हो तो वह सर्वर्था त्याज्य होती है चूंकि 15 अगस्त को अष्टमी सप्तमी विद्धा (संयुक्त) है अत: वह शास्त्रानुसार सर्वर्था त्याज्य है वहीं 16 अगस्त को अष्टमी तिथि नवमीं विद्धा (संयुक्त) है जो शास्त्रानुसार ग्राह्य है इसलिए स्मार्त व वैष्णव सभी श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को ही मनाना श्रेयस्कर रहेगा।
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