Publish Date: Fri, 01 May 2026 (12:14 IST)Updated Date: Fri, 01 May 2026 (15:56 IST)
Bada Mangal Ki Kathayen: हिन्दू पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ का महीना तपन और ऊर्जा का प्रतीक है। इसी महीने में आने वाले मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में आस्था का यह महापर्व 5 मई से शुरू हो रहा है। यह दिन न केवल पवनपुत्र हनुमान की भक्ति का है, बल्कि यह अधर्म पर धर्म और अहंकार पर विनम्रता की विजय का भी संदेश देता है।ALSO READ: Jyeshtha month festivals 2026: ज्येष्ठ माह के व्रत एवं त्योहार की लिस्ट
1. प्रभु श्री राम और हनुमान जी का मिलन
2. जब भीम का अहंकार हुआ चूर-चूर (महाभारत काल)
3. रावण की लंका और हनुमान का विराट रूप (रामायण काल)
4. बड़ा मंगल पर कैसे करें पूजन?
क्यों खास है बड़ा मंगल? जानें इसके पीछे का गौरवशाली इतिहास
बड़ा मंगल मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसके तार रामायण और महाभारत, दोनों ही युगों से गहराई से जुड़े हैं। आइए जानते हैं वे तीन मुख्य कारण, जो इस दिन को 'महा-मंगलवार' बनाते हैं:
1. प्रभु श्री राम और हनुमान जी का मिलन
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्री राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थे, तब उनकी भेंट पहली बार हनुमान जी से हुई थी। उस समय हनुमान जी ने एक ब्राह्मण (पुरोहित) का रूप धारण किया था। जिस दिन यह ऐतिहासिक मिलन हुआ, वह ज्येष्ठ मास का मंगलवार ही था। यही कारण है कि इस दिन हनुमान जी के साथ-साथ प्रभु श्री राम की उपासना का विशेष फल मिलता है।
2. जब भीम का अहंकार हुआ चूर-चूर (महाभारत काल)
महाभारत काल की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, गदाधारी भीम को अपनी अपार शक्ति पर बहुत घमंड हो गया था। उनके इस अहंकार को नष्ट करने के लिए हनुमान जी ने एक वृद्ध और कमजोर वानर का रूप धारण किया और रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर लेट गए। भीम ने जब पूंछ हटाने की कोशिश की, तो वे अपनी पूरी शक्ति लगाने के बाद भी उसे टस-से-मस नहीं कर पाए। अपनी हार स्वीकार कर जब भीम ने क्षमा मांगी, तब बजरंगबली ने उन्हें दर्शन दिए। चूंकि हनुमान जी ने वृद्ध रूप धरा था, इसलिए इसे 'बुढ़वा मंगल' कहा जाने लगा।ALSO READ: ज्येष्ठ माह 60 दिनों का: इस दौरान 5 राशियों की किस्मत के तारे रहेंगे बुलंदी पर
3. रावण की लंका और हनुमान का विराट रूप (रामायण काल)
एक अन्य प्रसंग के अनुसार, जब हनुमान जी माता सीता का संदेश लेकर लंका पहुंचे, तो अभिमानी रावण ने उन्हें 'तुच्छ बंदर' कहकर अपमानित किया। रावण के इसी मद को चूर करने के लिए बजरंगबली ने एक वृद्ध वानर से सीधे विराट रूप धारण कर लिया और अपनी पूंछ से सोने की लंका को भस्म कर दिया। यह पराक्रम भी ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही घटित हुआ था।
4. बड़ा मंगल पर कैसे करें पूजन?
इस पावन अवसर पर भक्त सुबह जल्दी स्नान कर हनुमान जी को चोला चढ़ाते हैं। विशेष रूप से बेसन के लड्डू, बूंदी और चमेली के तेल का दीपक अर्पित किया जाता है। जगह-जगह भंडारों का आयोजन होता है और प्यासे राहगीरों को जल पिलाना इस दिन का सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।
संक्षेप में कहा जाए तो बड़ा मंगल हमें सिखाता है कि शक्ति चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वह विनम्रता और भक्ति के बिना अधूरी है। यदि आप भी जीवन के संकटों से मुक्ति चाहते हैं, तो 5 मई को पहले बड़े मंगल पर बजरंगबली की शरण में जाना न भूलें।
जय श्री राम! जय बजरंगबली!
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