दिन में धुंध सिकुड़ती रैन,
आ गया फिर मफलरमैन।
रेलगाड़ियां ठप पड़ी हैं,
कैंसल हुआ जहाज।
रोज नहाना मुश्किल हो रहा,
न अच्छा लगे मसाज।
बुड्ढे-बच्चे सब बटुरे हैं,
हट गया सुख-चैन।
दिन में धुंध सिकुड़ती रैन,
आ गया फिर मफलरमैन।
बस गाड़ी सब रेंग रही है,
कुछ दे नहीं रहा दिखाई।
घुसे रजाई में बाबाजी,
खाते फिरे दवाई।
दादी अम्मा कहर रही है,
बढ़ गई उनकी पैन।
दिन में धुंध सिकुड़ती रैन,