मन को लुभा रहे हैं, ये फूल गुलमोहर के। ये लाल-लाल लुच-लुच, डालों पे डोलते हैं। कुछ ध्यान से सुनो तो, शायद ये बोलते हैं। सब लोग इन्हें देखें, रुक-रुक, ठहर-ठहर के। चुन्ना ने एक अंगुली, उस ओर है उठाई। देखा जो गुलमोहर तो, चिन्नी भी खिलखिलाई। मस्ती...