shiv chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

चींटी रानी पर कविता : चिंगारी

Advertiesment
poem on Ants
सिर पर टोपी आंखों पर चश्मा,
हाथों में मोबाइल।
चींटी रानी चली ठुमककर,
पैरों में थी पायल।
 

 
तभी अचानक बीच सड़क पर,
बस उनसे टकराई।
डर के मारे वहीं बीच में तीन,
पल्टियां खाईं।
 
थर-थर, थर-थर लगी कांपने,
बस अब डर के मारे।
उतर-उतरकर बाहर आए,
तभी मुसाफिर सारे।
 
हाथ जोड़कर सबने माफी,
मिस चींटी से मांगी।
तब जाकर मिस चींटीजी ने,
क्रोध मुद्रा त्यागी।
 
बस से बोली आगे से वह,
बीच राह न आए।
अगर दिखूं मैं कहीं सामने,
राह छोड़ हट जाए।
 
नहीं आंकना छोटों को भी,
कमतर मेरे भाई।
एक जरा सी चिंगारी ने,
अक्सर आग लगाई।

ऐसी और खबरें तुरंत पाने के लिए वेबदुनिया को फेसबुक https://www.facebook.com/webduniahindi पर लाइक और 
ट्विटर https://twitter.com/WebduniaHindi पर फॉलो करें। 
 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi