भरी लबालब स्याही से है, दादाजी की बड़ी दवात। उसमें कलम डुबाकर दादाजी, कागज पर लिखते हैं। लगता चांदी की थाली में, नीलम जड़े चमकते हैं। या लगता है स्वच्छ रेत पर, बैठी नीलकंठ की पांत। अच्छे-अच्छे बड़े कीमती, पापा पेन उन्हें देते। पर दादाजी धुन के...