शीत लहर के पंछी आ गए, रुई के पंखे लगा-लगा कर। चारों तरफ धुंध दिन में भी, कुछ भी पड़ता नहीं दिखाई। मजबूरी में बस चालक ने, बस की मस्तक लाइट जलाई। फिर भी साफ नहीं दिखता है, लगे ब्रेक, करते चीं-चीं स्वर। विद्यालय से जैसे-तैसे,...