लो साल नया फिर आया बच्चों
इतिहास नायाब इस बार तुम रचो,
बुरी आदतें अब तुरंत तुम छोड़ो
बुरी संगत से भी अपना मुँह मोड़ो,
कर लो बच्चों तुम एक यह प्रण
सेवा में सबकी रहना है अर्पण,
मात-पिता व गुरु का सदा मान करो
उनके आदर्शों पर अभिमान करो,
पढ़-लिखकर सदा अव्वल रहना
बातें सदा तुम शालीन ही कहना,
भाई-बहन व दोस्तों से प्रेम जताना
अच्छी सोहबत को ही सफल बताना,
नए साल के नए दिन भाएँ
गीत खुशी के हरदम गाएँ।