- कपिल पंचोली
बहुत दिनों से नहीं लिखी कोई चिट्ठी
किसी भी दोस्त को।
बहुत दिनों से नहीं आई कोई चिट्ठी
किसी भी दोस्त की।
सोच रहा हूँ
क्या दोस्त भी सोचते होंगे मेरी ही तरह
कि भेजे कोई उन्हें भी चिट्ठी
कि मिले चिट्ठी तो लिखें इक चिट्ठी
तो क्या मैं इंतजार करूँ चिट्ठी का
या खुद लिख भेजूँ इक चिट्ठी
अपने दोस्त के नाम
क्या पता चिट्ठी भेजकर घर आऊँ
और पा जाऊँ घर के दरवाजे पर
इक चिट्ठी
मेरे नाम
मेरे दोस्त की।