रखे टोकरी सिर पर कोयल,
इठलाते-इठलाते आई।
कौवे की घर की चौखट पर,
'सब्जी ले ले' लो टेर लगाई।
कौवा बोला नहीं पता क्या?
कितनी ज्यादा है मंहगाई।
सब्जी लेने के लायक अब,
नहीं रहा है तेरा भाई।
ऐसा कहकर कौवेजी ने,
आसमान में दौड़ लगाई|
फिर नीचे आकर मुन्ना की,
रोटी झपटी, छीनी खाई।