चंदा मामा हमें बताओ
रोज कहाँ से आते हो
कभी थाली से गोल दिखते हो
कभी हँसिया हो जाते हो।
वैसे तो तुम रोज ही आते
कभी-कभी छुप जाते हो।
मेरा मन करता है मामा
पास तुम्हारे आऊँ मैं
नहीं जानता इसके लिए
क्या तरकीब लड़ाऊँ मैं।
प्रस्तुति : चंद्रकला गंगवाल
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धरती गोल
- सीमा
धरती गोल और घूमते जाए
हम घूमे तो चक्कर आएँ
इस धरती का इक भी चक्कर
पैदल चलें तो लगा ना पाएँ
किताब में देखी जैसी धरती
स्कूल के बाहर नजर ना आए
इतनी बड़ी धरती रानी पर
हम सब बच्चे दौड़ लगाएँ
यही काम है अपने बस का
धरती पर सब दौड़ लगाएँ