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ओमप्रकाश चोरमा 'किलोलीवाला'
धागे से जब जुड़ी पतंग
हवा में उड़ पड़ी पतंग
धीरे-धीरे प्रयत्न करके
आसमान पर चढ़ी पतंग
नीली, पीली, लाल-गुलाबी
कई रंगों से जड़ी पतंग
भाँति-भाँति के रूप निराले
कोई छोटी कोई बड़ी पतंग
इधर जाए, उधर जाए
कभी रह जाए खड़ी पतंग
इसको काटा, उसको काटा
आपस में खूब लड़ी पतंग
धागे के बंधन से कटके
आसमान से झड़ी पतंग
आओ-आओ लूटे उसको
वो देखो वो पड़ी पतंग
पतंगबाज के हाथ में जाकर
फिर उड़ने चल पड़ी पतंग।