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श्रीमती रूपा भारती
चमकते तारे आसमान में
सबको भाते हैं
खिले फूल पौधों पर
सबको लुभाते हैं
उड़ती तितली रंग बिरंगी
सबको हर्षाती है
अच्छी बहुत लगे है चिड़िया
आसपास जब गाती है
तारे, फूल, तितली चिड़िया जैसे
क्यों नहीं हम बन जाते
कुछ कमी है हममें जो
सभी को बहुत नहीं भाते
तारों से शीतलता
का हम गुण ले लें
फूलों से कोमलता-मुस्कान
हम सब चुन लें
हँसी-खुशी विनम्रता
तितली से पाएँ
चिड़ियों से मीठा
कर्णप्रिय स्वर सीख जाएँ
जब होंगे हममें ये गुण
हम भी अच्छे कहलाएँगे
हम से होंगे सभी खुश
हम सबके प्यारे बन जाएँगे।