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बचपन की यादें...
बचपन मेरा ऐसा बीता,भूलूं पर मैं भूल ना पाऊंबैठूं उन्हीं कल-कल करती,नदिया के किनारेफिर बचपन की यादें दोहराऊं।जिन लहराते पेड़ों पर,डलते थे सुंदर बचपन के झूले।मन करता है उन पर झूलूं,और फिर सावन के गीत मैं गाऊं।गिरती थीं इस धरती पर,जब झम-झम वर्षा की बूंदें।छूती थीं वह तन-मन इतना,यह राज तुम्हें कैसे बतलाऊं।ऐसा था बचपन मेरा,भूलूं पर मैं भूल न पाऊं।-
शिल्पा विश्वकर्मा