जितेंद्र वर्मा (कक्षा 11वीं)
बात अच्छी है तो उसकी,
हर जगह चर्चा करो।
है बुरी तो दिल में रखो,
फिर उसे अच्छा करो।।
रोशनी करने का मतलब,
ये नहीं होता कि तुम।
जिसको पर्दा चाहिए,
उसको बेपर्दा करो।।
वो नदी है, जब भी चाहेगी,
डूबा देगी तुम्हें।
ज़िंदगी को राह में,
मत इस तरह रोका करो।।
फूल जब तोड़ा गया तो,
उसने सबसे ये कहा।
सबको खुशबू बाँटकर,
मेरी तरह टूटा करो।।
छाँव का मतलब समझने,
के लिए तुम भी,
चार पल तो जिंदगी की,
धूप में बैठा करो।।