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अलविदा बिली

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अलविदा बिली
लंदन। विलियम विंडसर उर्फ बिली बिल्कुल किसी सैनिक की भाँति रेजीमेंट के बाकी दोस्तों की बीच से आखिरी बार निकला। अब वह रॉयल आर्मी से रिटायर होने जा रहा है। रेजीमेंट के सारे दोस्तों ने इस 9 साल के बकरे बिली के‍ लिए तालियाँ बजाईं और उसे गुडबाय कहा। बिली अब लंदन के बाहर किसी चिड़ियाघर में रहेगा और उसकी जगह पर उसकी बिरादरी का दूसरा सदस्य ब्रिटिश रेजीमेंट में भर्ती होगा।

रॉयल आर्मी में किसी बकरे को शुभंकर के तौर पर शामिल करने की परंपरा पुरानी है। यह तब शुरू हुई थी जब अमेरिका अपनी स्वतंत्रता के‍ लिए लड़ रहा था। युद्ध के मैदान में कहीं एक बकरा आ गया और उसने ब्रिटिश रेजीमेंट के झंडे को जमीन पर गिरने नहीं दिया और इसके लिए अपनी जान दे दी। उसकी इस शहादत का सम्मान इस परंपरा के तौर पर व्यक्त किया जाता है।

1844 से आर्मी में इसे शामिल करने की परंपरा की शुरुआत हुई। बिली और उसकी बिरादरी के अन्य सदस्यों के लिए आर्मी में एक 'गोट मेजर' होता है जिसके जिम्मे इस साथी की देखरेख होती है। बिली को जब अलविदा कहने का वक्त आया तो रेजीमेंट के कुछ साथी भावुक भी थे। उनका एक साथी जो उनसे जुदा हो रहा था।

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