Publish Date: Mon, 09 May 2011 (12:08 IST)
Updated Date: Mon, 09 May 2011 (12:07 IST)
एड्स के खिलाफ मुकाबले में इसे एक महत्वपूर्ण सफलता करार दिया जा सकता है क्योंकि वैज्ञानिकों ने दावा किया कि उन्होंने यह पता लगा लिया है कि एचआईवी विषाणु किस तरह से मानव प्रतिरोधक क्षमता से बचता रहता है।
वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने कहा कि एचआईवी प्रतिरक्षा के बारे में हाल में मिली जानकारी से एड्स के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है। वैज्ञानिक एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में मानव रोग प्रतिरोधक क्षमता एडीसीसी की कार्यप्रणाली की खोज करके यह पता लगाने में सफल हुए कि यह विषाणु किस तरह से मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से बच निकलता है।
शोध में शामिल मुख्य वैज्ञानिक मेलबर्न विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टीफन केंट ने कहा कि एचआईवी से सुरक्षा के लिए तैयार किए जाने वाले टीकों में एडीसीसी प्रतिरक्षा काफी कारगर साबित हो चुकी है, लेकिन इसके प्रभाव को भी ठीक तरह से समझा नहीं जा सका था।
उन्होंने कहा कि यह परिणाम यह साबित करते हैं कि एचआईवी विषाणु कितने जिद्दी होते हैं, लेकिन इससे यह बात भी सामने आयी है कि ये एडीसीसी प्रतिरक्षा विषाणु को इस तरह से बदलने के लिए मजबूर करते हैं जिससे वह कमजोर होते हैं। (भाषा)
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