Publish Date: Sat, 02 Apr 2011 (17:19 IST)
Updated Date: Sat, 02 Apr 2011 (17:18 IST)
वैज्ञानिकों ने एक ऐसी बैटरी का इजाद करने का दावा किया है जो मीठे और समुद्रीजल के खारेपन में विभेद कर उर्जा पैदा कर सकती है। शोध के नेतृत्वकर्ता यी चुई ने कहा कि जब एश्चुरी के जरिए नदी का पानी समुद्र में प्रवेश करता है तो इस बैटरी का इस्तेमाल करके वहाँ उर्जा संयत्र बनाया जा सकता है।
ताजे पानी की कम उपलब्धता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तव में हमारे पास अथाह समुद्री जल है, दुर्भाग्य से मीठे पानी की मात्रा बहुत कम है। बैटरी से उर्जा पैदा करने की संभावना जाहिर करते हुए शोधकर्ताओं ने हिसाब लगाया कि यदि दुनिया की सभी नदियों में उनकी बैटरी का इस्तेमाल किया जाए तो एक साल में करीब दो टेरावॉट बिजली की आपूर्ति की जा सकती है जो मोटेतौर पर वर्तमान में दुनिया में इस्तेमाल होने वाली कुल उर्जा का 13 प्रतिशत है।
बैटरी अपने आप में बहुत ही आम है। इसमें दो इलेक्ट्रोड हैं, एक पॉसीटिव और एक नेगेटिव, जो विद्युत चार्ज कणों या लोहे की छड़ों से युक्त एक द्रव में डूबे रहते हैं। पानी में सोडियम या क्लोरीन आयन हैं, जो आम साल्ट के घटक हैं।
शुरुआत में बैटरी में मीठा पानी भरा जाता है और हल्के इलेक्ट्रिक करंट के जरिए इसे चार्ज किया जाता है। बाद में मीठा पानी निकालकर इसमें समुद्री जल भरा जाता है।
नैनो लीटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री पानी में आयन मीठे जल से 60 से 100 गुना अधिक होते हैं इसलिए दोनों इलेक्ट्रोंड के बीच वोल्टेज बढ़ जाता है। यह इसे बैटरी को चार्ज करने से अधिक बिजली पैदा करने में मददगार साबित होता है। (भाषा)
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