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दिल नहीं, दिमाग का मामला है

प्यार दिल से नहीं दिमाग से होता है

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दिल नहीं
अब तक लोग मानते आए हैं कि प्यार दिल से होता है और दिमाग से इसका कोई सरोकार नहीं होता। लेकिन विज्ञान कहता है कि प्यार दिमाग की बायोकेमिकल गतिविधियों का ही परिणाम है, जो विशेष परिस्थितियों में पैदा होता है।

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अमेरिकी शोधकर्ताओं की एक टीम ने 'साइंस ऑफ लव' संबंधी अनेक पहलुओं को उजागर किया। बतौर उदाहरण कि प्यार करने वाले इतने क्रेजी क्यों होते हैं, प्यार और शारीरिक संबंधों में कितना अंतर है और प्यार में धोखा खाने के बाद इतना दुःख क्यों होता है।

न्यूयॉर्क स्थित अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडीसिन के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. लूसी ब्राउन और उनके सहयोगियों ने उन कॉलेज विद्यार्थियों पर अध्ययन किया, जिनको हाल ही में प्यार का आभास हुआ। प्रयोग के दौरान विद्यार्थियों के सामने उनके प्रेमियों प्रेमिका की तस्वीर रख दी गई और उसकी तरफ देखने को कहा गया।

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शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों पर वे अध्ययन कर रहे थे, उनके दिमाग का एक विशेष हिस्सा अचानक सक्रिय हो गया। यह क्षेत्र किसी विशेष इच्छा या चाहत से जुड़ा हुआ है। इस दौरान ही दिमाग का एक और हिस्सा सक्रिय हो गया। वेंट्रल टेगमेंटल नामक इस भाग से न्यूरोट्रांसमीटर डोपामाइन निकलता है जो आनंद और उत्साह को नियंत्रित करता है।

डॉ. ब्राउन के अनुसार जब किसी को प्यार होता है तो दिमाग में डोपामाइन नामक पदार्थ की माँग उठने लगती है। इस अध्ययन से जुड़ी हुईं डॉ. हेलन फिशर के अनुसार प्यार होने की स्थिति में आपके शरीर में ठीक वही तंत्र सक्रिय हो जाता है, जो कोकेन जैसे नशीले पदार्थ का सेवन करने की स्थिति में होता है।

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