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'बिगफुट' की हकीकत...

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बिगफुट
वैज्ञानिकों का मानना है कि बिगफुट मनुष्यों और कपि के बीच की खोई हुई कड़ी नहीं है और वे कहते हैं कि इसका संबंध पोलर बीयर्स (ध्रुवीय भालुओं) से अधिक है। आनुवांशिक परीक्षणों (जैनेटिक टेस्ट्‍स) से यह पता लगा है कि ‍कथित तौर पर हिमालय में पाए जाने वाले येती के बालों के नमूने भालू के नमूनों से बहुत अधिक मिलते जुलते थे। हालांकि इनका डीएनए भालुओं के डीएनए से मैच करता है, लेकिन यह उनसे मेल नहीं खाता है जो कि आजकल जीवित हैं।
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वैज्ञानिकों ने एक गोल्डन ब्राउन हेयर सैम्पल का परीक्षण किया था, जिसे 40 वर्ष पहले भारत में मारा गया था। इसका डीएनए वास्तव में पोलर बीयर के उस फॉसिल से मेल खाता है जो कि 40 हजार वर्ष से भी पहले पाया जाता था। दुनिया के अन्य स्थानों पर वैज्ञानिकों ने कथित तौर पर बिगफुट, येती या अन्य ऐसे ही प्राणियों के कहे जाने वाले 30 हेयर सैम्पल्स का डीएनए टेस्ट किए और बताया कि ये भालुओं, घोड़ों और एक साही तक के हैं, लेकिन किसी कपि जैसे प्राणी के नहीं हैं। साथ ही, ऐसे किसी प्राणी के नमूने नहीं हैं जो कि साइंस के लिए पूरी तरह से नए हों।

सबसे बड़ा खुलासा कथित तौर पर येती के बालों के दो नमूनों से हुआ जो कि हिमालय से एकत्रित किए गए थे। इन दोनों ही बालों का डीएनए मटेरियल एक पोलर बीयर की हड्‍डी से मैच हुआ जो कि हाई आर्कटिक में 2004 में खोजी गई थी। हालांकि यह एक अलग तरह का प्रयास था। यह हड्‍डी भी एक लाख वर्ष से अधिक पुरानी बताई जाती है।

यह भी कहते हैं शोधकर्ता... पढ़ें अगले पेज पर...


नए अध्ययन पर काम करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि शायद यह यदि येती का ही एक नया स्वरूप है जो कि भालू की एक नई प्रजाति हो अथवा यह एक पोलर बीयर या ब्राउन बीयर का अज्ञात मिश्रण हो। पर शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें किसी नए नरवानर (प्राइमेट) का कोई सुराग नहीं मिला है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति के अनुमानों से भ्रम पैदा हुआ है और बिगफुट का शोध बहुत ही मुश्किल है। उसे एक बहुत ही दुर्लभ नस्ल का प्राणी माना जा सकता है लेकिन यह एक परिकल्पना तक ही सीमित है। इसका वैज्ञानिक परीक्षण किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि बिगफुट अभी भी एक संभावना ही है और इसके बारे में तब तक कोई निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता है जब त‍क कि वैज्ञानिक साक्ष्य सामने नहीं आते हैं।

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