विदेशी भाषा पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण संस्थान

भारतीय भाषाविदों के लिए अवसर

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जब अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारतीय प्रोफेशनल्स से व्यवहार करती हैं तो अच्छे कौशल के साथ कुछ और गंभीर मुद्दे भी जुड़ जाते हैं। जो लोग अनुवाद कार्य से जुड़े हैं, वे इन मुद्दों से अच्छी तरह परिचित हैं, क्योंकि इन्हें नियमित रूप से इनका सामना करना पड़ता है।

भाषात्मक गुरुत्वार्षण के नए केंद्रों के प्रादुर्भाव ने यह इशारा किया है कि उन अभिलाषी पेशेवरों के लिए आर्थिक अवसरों का सागर उमड़ रहा है, जो दो तरीकों से सुविज्ञता हासिल कर सकते हैं :

-जिनका दो प्रमुख भाषा समूहों एफआईजीएस (फ्रेंच, इटालियन, जर्मन, स्पेनिश) और सीजेक (चीनी, जापानी और कोरियाई) में से कम से कम किसी एक भाषा पर बहुत अच्छा नियंत्रण हो।

-एक या अधिक प्रमुख उद्योगों यथा मशीनरी निर्माण, आईटी/ सॉफ्टवेयर, फार्मास्युटिकल्स, लीगल/पेटेंट आदि की अच्छी समझ हो।
  भारतीय अच्छी अँगरेजी बोलते हैं और इसलिए उनकी लिखी गई अँगरेजी भाषा की गुणवत्ता उतनी ही अच्छी होती है। फिर भी देखा यह गया है कि हमारे यहाँ जितने भी अनुवादक हैं, उनके अँगरेजी लेखन में मातृभाषा का प्रभाव पड़ ही जाता है।      


इस समय सारी दुनिया भारतीय भाषाविदों की तरफ देख रही है, क्योंकि भारतीय भाषाकारों की उपरोक्त समूहों की भाषा से अतिरिक्त अँगरेजी भाषा पर भी खासी पकड़ है। यह लगभग असंभव है कि कोई भी विशिष्ट भारतीय प्रोफेशनल अँगरेजी से फ्रेंच में अनुवाद का कार्य करेगा, लेकिन उसकी बजाय उसके पास फ्रेंच से अँगरेजी में अनुवाद कामों का ढेर लग जाएगा। इसलिए अँगरेजी लेखन कला एक उच्च गुणवत्ता होना चाहिए, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा सके। यहाँ टूटी-फूटी या अँगरेजी के भारतीय संस्करण से कम नहीं चलने वाला है।

पहली समस्या है समय प्रबंधन की। अक्सर डिलेवरी के लिए भारतीय समय का पालन किया जाता है। जब कोई हमसे सोमवार को अनुवाद माँगता है तो हम उसे सुबह 9 बजे की बजाय रात 11 बजकर 59 मिनट पर अनुवाद देकर कहते हैं कि सोमवार को ही तो डिलेवरी दी है। कभी-कभी तो हमारे यहाँ घड़ियों तक को आगे पीछे कर दिया जाता है।

हमारे 'इंडियन टाइम' ने हमारी कार्यक्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, जबकि विदेशों में 'टाइम इज मनी' का सिद्धांत पालन किया जाता है। ऐसी स्थिति में बेहतर तो यही है कि यदि आप समय पर काम करके दे सकते हैं तो बजाय बाजार में अपनी साख खराब करने के सीधे काम करने से इंकार कर दें, क्योंकि समय पर काम न करने से आपको नहीं पूरे अनुवादक समुदाय को ब्लैक लिस्टेड किया जा सकता है।

हमारी दूसरी कमजोरी है कमजोर संपादन। आमतौर पर हमारे यहाँ यह गलतफहमी प्रचलित है कि भारतीय अच्छी अँगरेजी बोलते हैं और इसलिए उनकी लिखी गई अँगरेजी भाषा की गुणवत्ता उतनी ही अच्छी होती है। फिर भी देखा यह गया है कि हमारे यहाँ जितने भी अनुवादक हैं, उनके अँगरेजी लेखन में मातृभाषा का प्रभाव पड़ ही जाता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह गलत न भी दिखाई दे, लेकिन जो ग्राहक उच्च स्तरीय भाषा चाहते हैं, वे हमारे अनुवाद पर विपरीत टिप्पणी देते हैं।

हमारे यहाँ एक प्रवृत्ति और दुःखदायी है, वह यह कि काम शुरू करने के बाद हमारे यहाँ पारिश्रमिक में भावतौल होने लगता है। हालाँकि आजकल यह स्थिति बदली है, लेकिन कुछ साल पहले तक यह सामान्य बात थी कि फ्री-लांसर कुछ दिनों तक काम करने के बाद अपना पारिश्रमिक बढ़ाने की माँग करने लगते हैं। उनकी यह माँग उस समय भले ही मान ली जाए, लेकिन भविष्य के लिए उन्हें निश्चित ही 'ब्लैक लिस्टेड' कर दिया जाता है।

क्या करें अभिलाषी भाषाविद्?
कौशल प्राप्त करें- सीधा-सा उत्तर है कि यदि आपको अनुवाद में करियर बनाना है तो आपको कौशल प्राप्त करना चाहिए। आप जो कहें उसे करें और वही कहें जो आप कर सकें। यह बहुत आसान दिखाई देता है, फिर भी यह एक ऐसी आदत है, जिसे केवल तब ही मन में बैठाया जा सकता है, जब कोई इसे सोच-समझकर व्यवहार में लाए। कौशल प्राप्त करने का अर्थ यह है कि अनुवाद में डिप्लोमा प्राप्त करें, लेकिन इसे भाषा पाठ्यक्रम समझने की गलती नहीं करना चाहिए।

अपनी मार्केटिंग खुद करें
पहली बात यह है कि खुद के धंधे की कोई होड़ नहीं है। इसलिए अपने शहर की किसी अनुवाद एजेंसी की पहचान कर उसके कार्य पर थोड़ा अध्ययन करें। अपना सीवी तैयार कर उन क्षेत्रों को हाईलाइट करें, जिनमें आपकी रुचि हो। यदि आप अनुवाद की शुरुआत कर रहे हों तो बताना न भूलें और यह भी बताएँ कि आप किस क्षेत्र में काम करना पसंद करेंगे। आपको यह भी बताने की आवश्यकता होगी कि आपने किस क्षेत्र में सुविज्ञता हासिल की है और साथ ही अपनी रुचि की पुस्तकें पढ़ना न भूलें।

उदाहरण के लिए यदि आप जापानी में स्पेशलिस्ट फाइनेंशियल ट्रांसलेटर बनना चाहते हैं, तो आप बाण्ड्स डेरिवेटिव्ज के बारे में पढ़ें तथा संबंधित विषय में प्रयुक्त किए जाने वाले शब्दों की जापानी से अँगरेजी शब्दावली तैयार करें। जब आप पूरी तरह तैयार हो जाएँ तो संबंधित फर्म के प्रोजेक्ट मैनेजर या वेंडर मैनेजर से मिलकर शर्तों का निर्धारण करें। एक बार यदि आप घरेलू मोर्चे पर सफल हो गए तो आप किसी भी ऑनलाइन फोरम जैसे कि प्रोज (डि), ट्रांसलेटर्स कैफे ई-लांस से अनुवाद काम के लिए संपर्क करें।

अपना चयन औरों के लिए आसान बनाएँ
यह संभव नहीं है कि अनुवाद के क्षेत्र में आप अकेले अनुवादक हैं। इसलिए लोग आपके पास दौड़े चले आएँगे। इस सच्चाई को स्वीकार करते हुए आपको उन प्रश्नों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए कि 'मैं आपका नाम अनुवादकों की सूची में क्यों जोडूँ?'

इसका जवाब बुद्धिमत्तापूर्वक देने के बारे में विचार करें। साथ ही काम पाने के लिए अपना पारिश्रमिक घटाने पर भी सोचें। यदि आप शुरुआत कर रहे हैं तो थोड़ा विचार करें, अन्य कारण यह भी हो सकते हैं-

- ऐसे विषय चुनें, जो आसानी से उपलब्ध न हों।

- प्रमुख सीएटी टूल्स एसटीएल ट्रेडोज या अन्य कम जाने-पहचाने टूल्स का उपयोग कर काम डिलेकर करना सीखें।

- प्रतिस्पर्धात्मक दरें प्रस्तुत करें। इसके लिए मार्केट रिसर्च करें।

- उधारी पर काम करना सीखें। भुगतान अवधि लंबी रखने पर ज्यादा काम मिल सकता है। अधिकांश एजेंसियों को अपने ग्राहकों से 60 या 75 दिनों में भुगतान मिलता है। इसलिए वह आपको इससे पहले भुगतान नहीं करना चाहेंगे।

- हमेशा संपर्क में बने रहें। मोबाइल नंबर दें या आधे-आधे घंटे में ई-मेल देखें।

- अर्जेंट काम होने पर छुट्टी वाले दिन काम के लिए तैयार रहें।

- इंटरनेट कनेक्शन रखें।

लाभ और हानि
स्वतंत्र अनुवादक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि आप वह काम चुन सकते हैं, जो आप करना चाहते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार कार्य अवधि निर्धारित कर सकते हैं। आप यह तय कर सकते हैं कि छुट्टी के दिन काम करना है अथवा नहीं।

यह सब देखकर लगता है कि आप अपनी मर्जी के राजा हैं। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं और सिलेक्टिव बन जाते हैं तो आपको प्रतिस्पर्धा में टिकना मुश्किल होगा। कारण स्पष्ट है। अधिकांश एजेंसियाँ और ग्राहक दुनियाभर के उन तमाम अनुवादकों/भाषाविदों के संपर्क में रहते हैं, जिनका ई-मेल अकाउंट होता है।

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