Publish Date: Wed, 15 Jun 2016 (20:01 IST)
Updated Date: Wed, 15 Jun 2016 (20:05 IST)
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेन्द्र मोदी के भाषण आपको याद होंगे। महंगाई के मुद्दे पर मोदी ने तत्कालीन यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि गरीब की कटोरी से दाल गायब हो रही है। ...लेकिन, क्या अब दाल गरीब की कटोरी में आ पाई है। हकीकत में दाल तो अच्छे दिन की राह देख रहे गरीब की थाली से और दूर हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में दाल का उत्पादन 1.7 करोड़ टन होता है जबकि खपत 2.36 करोड़ टन है। भारत बाहरी देशों से 55 लाख टन का आयात करता है।
लोकसभा चुनाव में अनपेक्षित सफलता का स्वाद चखने के बाद मोदी ने 26 मई, 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। तब और अब के दाल के भावों में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है। दालों के दाम घटना तो दूर की बात है, बल्कि अब कीमत पहले की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है।
मोदी के शपथ लेने समय चने की दाल के दाम 50 रुपए के आसपास थे, जो कि अब 94 रुपए पर पहुंच गए हैं। यानी सीधे 44 रुपए की बढ़त। अरहर दाल (तुअर दाल) के भाव जो 75 रुपए थे, वे अब 151 के आसपास हैं अर्थात दोगुने से ज्यादा दाम बढ़ चुके हैं। यही हाल उड़द दाल का भी है। उस समय उड़द दाल के भाव 71 रुपए के लगभग थे, जो कि अब बढ़कर 161 रुपए हो गए हैं। तब से अब तक दाल के दामों में 90 रुपए का अंतर आ चुका है।
इन दिनों सरसों तेल, सब्जियां एवं अन्य चीजों के दाम भी आसमान को छू रहे हैं। लोगों को अब उस दिन का इंतजार है, जब मोदी सरकार या भाजपा की ओर से यह बयान आएगा कि महंगाई घटाने का उनका वादा चुनावी जुमला भर था।