नीट (NEET) के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें...

देश की नई सरकार ने भारत में चिकित्सा स्नातक के पाठ्यक्रमों-एमबीबीएस, बीडीएस में प्रवेश पाने के लिए एक अर्हक परीक्षा (क्वालीफाईंग एंट्रेस एक्जाम) परीक्षा पास करने वाले छात्रों को उनके अर्जित अंकों के आधार पर चाहे गए शिक्षा संस्थानों में प्रवेश का कानून बनाया है। यह परीक्षा इसके पहले 'एआईपीएमटी' (ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट) कहलाती थी और इसकी परीक्षा ‍देशभर में एक साथ होती थी और इसके परिणाम के आधार पर सभी केन्द्र सरकार द्वारा संचालित मेडिकल संस्थानों में छात्रों को प्रवेश दिया जाता था।
* एआईपीएमटी अखिल भारतीय स्तर होती थी और राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए पीएमटी (प्री-मेडिकलटेस्ट) होती थी। इन दोनों परीक्षाओं के आधार पर देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटें भरी जाती थीं।
 
* पूर्व में यह परीक्षा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा संचालित होती थी। लेकिन वर्ष 2016 की परीक्षाओं के लिए केन्द्र सरकार ने नीट (एनईईटी) परीक्षा आयोजित कराने का फैसला किया। इस परीक्षा से निजी मेडिकल कॉलेजों को तकलीफ हुई और उन्होंने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।       
 
* सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों यह फैसला सुनाया था कि 1 मई को नीट (NEET) का पहला चरण आयोजित किया जा चुका है। परीक्षा का दूसरा चरण 24 जुलाई को होगा। केंद्र सरकार, राज्यों और विद्यार्थियों ने नीट को रोकने की मांग की थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से मना कर दिया था और कहा था कि इसे मात्र एक वर्ष के लिए टाला जा रहा है। अगले वर्ष से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की परीक्षाएं नीट से ही होंगी।
 
* इस परीक्षा को लेकर छात्रों का कहना था कि जिन परीक्षार्थियों की परीक्षा पहले हुई उन्हें तैयारी करने के लिए कम समय मिला। पर जिन परीक्षार्थियों को दूसरे चरण में परीक्षा देनी होगी उन्हें परीक्षा की तैयारी के लिए अधिक समय मिलेगा, जबकि सभी छात्रों को समानता से मौका मिलना चाहिए था।   
 
* बहुत से छात्र ऐसे हैं जो कि नीट के अलावा राज्य की प्रवेश परीक्षा या अन्य परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रहे हैं। इस कारण से उन्हें नीट और कॉमन एडमिशन टेस्ट (सीईटी) की भी तैयारी करनी पड़ेगी और इन परीक्षाओं का पाठ्‍यक्रम भी अलग-अलग है। छात्रों की मुसीबतों को देखते हुए कई राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। इनके अलावा जिन राज्यों में नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए जाने हैं, उन्होंने भी इन्हें चलाने से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। यह स्थिति हिमाचल प्रदेश की है। 
 
* अगले वर्ष से नीट शुरू हो जाने के कारण छात्रों की काफी समस्याएं सुलझ जाएंगी और इससे छात्रों का ही भला होगा। छात्रों को अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग स्थानों पर परीक्षा नहीं देनी होगी, लेकिन फिलहाल ऐसे छात्र परेशान हैं जो कि उदाहरण के लिए, उप्र की सीपीएमटी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन नीट के कारण उन्हें सीबीएसई का कोर्स भी पढ़ना होगा। 
 
* केंद्र और कई राज्य तर्क दे रहे हैं कि छात्रों को NEET के लिए समान समय मिलना चाहिए। वे अलग अलग राज्यों के लिए स्थानीय भाषाओं में भी NEET की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को ठुकरा दिया है और राष्ट्रपति द्वारा नीट के अध्यादेश पर हस्ताक्षर भी किए जा चुके हैं। इसलिए NEET परीक्षा का दूसरा चरण 24 जुलाई को होगा। फिलहाल इस व्यवस्था से छात्रों को तकलीफें हो सकती हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट की पहल पर नीट कानून बन जाने से प्राइवेट कॉलेजों की मनमानी रुकेगी और वहीं लाखों छात्रों का हित भी होगा। 
 
* केंद्र सरकार और तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश ने एतराज जताया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर अपील की सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में बदलाव करे। राज्यों और प्राइवेट कॉलेजों को इस साल के लिए MBBS और BDS की प्रवेश परीक्षा लेने की इजाजत दी जाए। सरकार ने अपील की थी कि एक मई को होने वाली परीक्षा रद्द करके सिर्फ 24 जुलाई को ही परीक्षा कराई जाए।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में किसी बदलाव से साफ मना कर दिया।
 
* नीट के दोनों चरणों की परीक्षा के बाद रिजल्ट 17 अगस्त को आएगा। जिन छात्रों ने 1 मई को परीक्षा दी होगी, उसे कई महीनों तक नतीजे का इंतजार करना होगा। हालांकि देश भर में तमाम मेडिकल छात्र और शिक्षक ये मान रहे हैं कि NEET ही बेहतर है। इससे छात्रों की तैयारी बेहतर होगी और उनका शोषण भी नहीं होगा। प्राइवेट कॉलेजों की मनमानी भी नहीं चलेगी।
 
* अभी तक देश में मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए अलग-अलग 90 परीक्षाएं होती थीं। CBSE बोर्ड AIPMT के नाम से परीक्षा करवाता था। जबकि हर राज्य की अलग अलग मेडिकल प्रवेश परीक्षा होती थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर देश के 600 निजी मेडिकल कॉलेजों पर भी पड़ेगा जो कि पैसे लेकर मेडीकल सीटें बेचने के लिए कुख्यात रहे हैं, लेकिन नीट के प्रभावी होने से सभी किस्म के भेदभाव और सीटों की खरीद-फरोख्त से छुटकारा मिलेगा। 
 
* इस साल राज्य सरकारों को नीट से बाहर रखा गया है, लेकिन निजी कॉलेजों की सीटें नीट के जरिए ही भरी जाएंगी। 24 जुलाई को होने वाले नीट के दूसरे चरण की परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही होगी। केवल इस साल के लिए छात्रों के पास यह अधिकार होगा कि या तो वे राज्य सरकारों की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षा में बैठें या नीट में। 
 
* केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए परास्नातक (पीजी) के लिए इस साल दिसंबर में होने वाली प्रवेश परीक्षा नीट ही होगी। सरकार ने इस अध्यादेश पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश प्रभावी हो गया है जिसमें देश के सभी सरकारी, डीम्ड यूनिवर्सिटी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए एक समान प्रवेश परीक्षा नीट को अनिवार्य कर दिया गया है। 
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