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भारतीय कप्तानों के लिए भाग्यशाली रहा है होलकर स्टेडियम

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, शुक्रवार, 22 सितम्बर 2017 (13:04 IST)
इंदौर। विराट कोहली का 7 टेस्ट पारियों में 1-1 रन के लिए तरसने के बाद दोहरा शतक जमाना हो या फिर वीरेन्द्र सहवाग का वनडे में सर्वोच्च स्कोर का तत्कालीन रिकॉर्ड, भारतीय कप्तानों के लिए देश के पहले टेस्ट कप्तान सीके नायडू के शहर इंदौर का होलकर स्टेडियम शुरू से भाग्यशाली रहा है।
 
बात 2016 की है, जब कोहली अपनी बेहतरीन फॉर्म में थे और उनका बल्ला रन उगल रहा था लेकिन इस बीच टेस्ट मैचों में ऐसा भी दौर आया जबकि 7 टेस्ट पारियों में वे केवल 18.85 की औसत से 132 रन ही बना पाए थे। ऐसे में कोहली के आलोचक सक्रिय हो गए थे। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरा टेस्ट मैच 8 से 11 अक्टूबर के बीच होलकर स्टेडियम में खेला जाना था। इससे पहले श्रृंखला की 4 पारियों में कोहली ने 9, 18, 9 और 45 रन बनाए थे।
 
होलकर स्टेडियम इस मैच से टेस्ट स्थल भी बना और इसे 211 रन की जोरदार पारी खेलकर यादगार बनाया कप्तान कोहली ने। उस समय यह कोहली का टेस्ट मैचों में सर्वोच्च स्कोर भी था। भारत ने यह मैच 321 रन के विशाल अंतर से जीता था। वर्तमान वनडे श्रृंखला में कोहली पहले मैच में खाता नहीं खोल पाए थे जबकि दूसरे में शतक से चूक गए थे। उनकी निगाह होलकर में रिकी पोंटिग के 30 शतकों का रिकॉर्ड तोड़ने पर रहेगी।
 
यहां खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में टॉस भी कोहली ने जीता था। यही नहीं, होलकर में अब तक जितने एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेले गए हैं उन सभी में सिक्के ने भारतीय कप्तानों का साथ दिया। भारत इन सभी मैचों में जीत दर्ज करने में भी सफल रहा। इसलिए जब कोहली की टीम यहां 24 सितंबर, रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरा वनडे खेलने के लिए उतरेगी तो उसका लक्ष्य यहां शत-प्रतिशत जीत का रिकॉर्ड बरकरार रखना होगा।
 
होलकर में पहला वनडे 15 अप्रैल 2006 को इंग्लैंड के खिलाफ खेला गया था जिसमें भारत ने 7 विकेट से जीत हासिल की। उस श्रृंखला में भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ रन बनाने के संघर्ष कर रहे थे लेकिन अपने जन्म स्थान इंदौर में उन्होंने तब 69 रन की पारी खेलकर भारतीय जीत में अहम भूमिका निभाई थी। इंग्लैंड के खिलाफ 17 नवंबर 2008 को महेंद्र सिंह धोनी के अगुवाई में खेला गया वनडे भारत ने 54 रन से जीता था।
 
धोनी को हालांकि 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में विश्राम दे दिया गया और उनकी जगह सहवाग को टीम की कमान सौंप दी गई। श्रृंखला के पहले 3 मैचों में सहवाग केवल 20, 26 और 0 रन ही बना पाए थे। उन पर बड़ी पारी खेलने का दबाव था और ऐसे में उन्हें होलकर स्टेडियम ने आदर्श स्थिति उपलब्ध कराई, जहां गेंद बल्ले पर अच्छी तरह से आ रही थी और बाउंड्री भी अपेक्षाकृत थोड़ी छोटी है। 
 
सहवाग ने 8 दिसंबर 2011 को खेले गए मैच में 219 रनों की लाजवाब पारी खेली। इसके लिए उन्होंने 149 गेंदों का सामना किया तथा 25 चौके और 7 छक्के लगाए। सहवाग ने सचिन तेंदुलकर के नाबाद 200 रन के रिकॉर्ड को तोड़ा, जो उन्होंने 24 फरवरी 2010 को ग्वालियर में बनाया था।
 
संयोग देखिए कि वनडे में 4 दशक तक कोई दोहरा शतक नहीं बना लेकिन जब शुरुआत हुई तो 2 साल के अंदर 2 दोहरे शतक लग गए और इन दोनों का गवाह मध्यप्रदेश की धरती बनी। सहवाग का रिकॉर्ड बाद में रोहित शर्मा ने तोड़ा जिन्होंने 13 नवंबर 2014 को श्रीलंका के खिलाफ कोलकाता में 264 रन बनाए थे।
 
इंदौर में रिकॉर्ड बनाने के बाद सहवाग का बल्ला फिर से कुंद पड़ गया था। इसके बाद उन्होंने संन्यास लेने तक जो 11 वनडे मैच खेले उनमें वे 22.54 की औसत से 248 रन ही बना पाए जिसमें केवल 1 अर्द्धशतक शामिल था।
 
होलकर में आखिरी वनडे 14 अक्टूबर 2015 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला गया था जिसके नायक कप्तान महेंद्र सिंह धोनी रहे थे। धोनी अपनी कप्तानी में इस मैदान पर पहले खेले गए मैच में बल्ले से कमाल नहीं दिखा पाए थे लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने विकेट के आगे और विकेट के पीछे अच्छा प्रदर्शन करके भरपाई कर दी थी।
 
धोनी ने तब विषम परिस्थितियों में 92 रनों की नाबाद पारी खेली थी और बाद में 3 कैच और 1 स्टंप भी किया था। भारत ने 22 रनों से मैच जीता और धोनी को 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उस श्रृंखला के 5 वनडे में यह एकमात्र मैच था जिसमें धोनी ने अर्द्धशतकीय पारी खेली थी। (भाषा)

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