Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

लापरवाही के चलते भी सड़क पर हो रही मौतें, 2020 में 1.20 लाख लोग मरे

हमें फॉलो करें webdunia

DW

मंगलवार, 21 सितम्बर 2021 (16:37 IST)
रिपोर्ट : आमिर अंसारी
 
देश में पिछले साल कोरोना के कारण लॉकडाउन लगा था लेकिन सड़क हादसों में कोई कमी नहीं आई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि हर रोज औसतन 328 लोगों की मौत हुई।
 
देश में पिछले साल लापरवाही से हुए सड़क हादसों के कारण 1.20 लाख लोगों की मौत हुई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 में कोरोनावायरस महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के बावजूद हर रोज औसतन 328 लोग सड़क हादसे में मारे गए। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 3 साल के दौरान 3.92 लाख लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई।
 
सड़क पर लापरवाही
 
एनसीआरबी की वार्षिक क्राइम इंडिया रिपोर्ट 2020 में खुलासा किया कि सार्वजनिक सड़क पर तेज गति से या लापरवाही से वाहन चलाने से चोट लगने के मामले 2020 में 1.30 लाख, 2019 में 1.60 लाख और 2018 में 1.66 लाख रहे, जबकि इन सालों में गंभीर चोट लगने के क्रमश: 85,920, 1.12 लाख और 1.08 लाख मामले दर्ज किए गए।
 
आंकड़ों के मुताबिक 2020 में 1.20 लाख ऐसी मौतें दर्ज की गईं, यह आंकड़ा 2019 में 1.36 लाख और 2018 में 1.35 लाख था। समय बचाने या फिर जागरुकता की कमी के कारण वाहन चालक लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं या बचाव के लिए हेलमेट आदि का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
 
हिट एंड रन के मामले भी चिंता का विषय है। देश में हिट एंड रन के मामले पिछले साल 41,196 दर्ज किए गए। वहीं 2019 में 47,504 और साल 2018 में 47,028 मामले दर्ज किए गए थे। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक साल में देश भर में हर दिन औसतन हिट एंड रन के 112 मामले दर्ज किए गए।
 
अंतरराष्ट्रीय सड़क संगठन (आईआरएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में 12 लाख लोगों की प्रति वर्ष सड़क हादसों में जान जाती है। रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया भर में वाहनों की कुल संख्या का करीब 3 फीसदी हिस्सा भारत में है, लेकिन देश में होने वाले सड़क हादसों और इनमें जान गंवाने वालों के मामले में भारत की हिस्सेदारी 12 फीसदी है। इस हिसाब से देखें तो सड़क हादसों में भारत का ग्राफ बहुत बुरा है।
 
कानून की फिक्र किसे?
 
तेज गति, कार चलाने के दौरान सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करना, गाड़ी चलान के दौरान मोबाइल पर बात करना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, मोटर साइकिल चालक और सवारी का हेलमेट नहीं लगाना कई बार हादसे का कारण बनता है। ओवरलोड वाहनों के कारण भी गंभीर हादसे होते हैं। महानगरों में तो सड़कों पर ऊंचे बैरिकेड लगा दिए गए हैं ताकि वाहन दूसरी लेन से उलटी दिशा में आने वाली गाड़ियों से ना टकराए लेकिन पैदल यात्रियों के लिए सड़क पार करने की सही व्यवस्था नहीं की जाती है, ऐसे में कई बार पैदल यात्री सड़क पार करने के लिए जोखिम उठाते हैं और हादसे का शिकार होते हैं।
 
साल 2019 में मोटर व्हीकल कानून में संशोधन किया गया था जिसके बाद ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाना मुमकिन हुआ। कानून में संशोधन का मकसद लोगों में ट्रैफिक नियमों को तोड़ने को लेकर भय भरना था क्योंकि इससे पहले तक जुर्माने की राशि बहुत कम होती थी।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत, एक उलझी पहेली...