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नासा की जेम्स वेब दूरबीन ब्रह्मांड की शुरुआत के रहस्य खोजेगी

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DW

, शुक्रवार, 10 दिसंबर 2021 (16:27 IST)
नासा की जेम्स वेब दूरबीन अंतरिक्ष में भेजी जाने वाली अभी तक की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली दूरबीन है। इसके जरिए वैज्ञानिक अंतरिक्ष की गहराइयों में और अरबों साल पीछे के समय में झांक पाएंगे।
 
नासा ने कहा है कि हबल दूरबीन की जगह लेने वाली जेम्स वेब दूरबीन उस समय में झांकने में वैज्ञानिकों की मदद करेगी जब सबसे पहली आकाशगंगाओं का बनना शुरू हुआ था। नासा के शब्दों में यह 'अंतरिक्ष का और समय का ऐसा हिस्सा है जिसे कभी देखा नहीं गया।'
 
यानी ब्रह्मांड की जवानी के दिन, बिग बैंग सिर्फ कुछ करोड़ों साल बाद। नासा के गॉडार्ड अंतरिक्ष उड़ान केंद्र में इंस्ट्रूमेंट सिस्टम्स इंजीनियर बेगोनिया विला ने एक वार्ता में बताया कि दूरबीन समय में करीब एक अरब 35 करोड़ साल पीछे देखने की कोशिश करेगी, जो कि 'विज्ञान के लिए काफी उत्कृष्ट लक्ष्य' है।
 
बीते समय में देखना
 
उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य है वैज्ञानिकों को यह मालूम करने का मौका देना कि आकाशगंगाएं 'कैसे बदलीं और वैसी बनीं जिस रूप में आज हम उनमें रहते हैं।' टेलिस्कोप सबसे पहले बने सितारों का भी अध्ययन करेगी और 'पानी, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन जैसे जीवन का संकेत माने जाने वाले तत्वों' को खोजने की कोशिश करेगी।
 
रोशनी को यात्रा करने में लगने वाले समय की वजह से अंतरिक्ष की गहराइयों में देखने का मतलब बीते समय में देखना होता है। उदाहरण के तौर पर सूरज की रौशनी को पृथ्वी पर पहुंचने में आठ मिनटों का समय लगता है। हबल एक अरब 34 करोड़ सालों से आगे नहीं जा पाई और उसने जीएन-जेड11 नाम की अभी तक जानी जाने वाली सबसे पुरानी आकाशगंगा की खोज की।
 
जीएन-जेड11 के बारे में सबसे पहले बताने वाले स्विट्जरलैंड के तारा-भौतिकविद पास्कल ओश का कहना है कि वो प्राचीन आकाशगंगा भले की सिर्फ एक बिंदु थी लेकिन वो 'एक आश्चर्य भी थी और उसमें ऐसा प्रकाश था जिसकी किसी ने इतनी दूर से उम्मीद नहीं की थी।'
 
इंफ्रारेड से लैस दूरबीन
 
1990 में लॉन्च की गई हबल मुख्य रूप से दिखाई देने वाली रोशनी पर काम करती है वेब इंफ्रारेड पर ध्यान केंद्रित करती है। उसे 22 दिसंबर को लॉन्च किया जाएगा। नासा का कहना है कि ब्रह्मांड के सबसे पहले रोशनी वाले पिंडों से जो रोशनी निकली थी वो ब्रह्माण्ड के लगातार होते विस्तार की वजह से आज हम तक इंफ्रारेड के रूप में पहुंचती है।
 
वेब हबल से काफी ज्यादा संवेदनशील है और उम्मीद की जा रही है कि वो और ज्यादा बारीकियों वाली तस्वीरें उपलब्ध करवाएगी। उसकी इंफ्रारेड क्षमता तारों के बीच मौजूद धूल के बादलों के अंदर भी देख पाएगी को अक्सर सितारों की रोशनी को सोख लेती है।
 
फ्रेंच अटॉमिक एनर्जी कमीशन में तारा-भौतिकविद डेविड एल्बाज कहते हैं कि इससे 'इन बादलों के अंदर, सितारों और आकाशगंगाओं के जन्म को देखना मुमकिन हो पाएगा।' वेब को नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और कैनेडियन अंतरिक्ष एजेंसी ने मिल कर बनाया है।
 
सीके/एए (एएफपी)

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