अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया लोगों के व्हाट्‍सएप मैसेज पढ़ना चाहते हैं

रविवार, 6 अक्टूबर 2019 (09:46 IST)
अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने फेसबुक से कहा है कि वो सुरक्षा और अपराध से जुड़ी चीजों के चलते एनक्रिप्टेड मैसेजों को पढ़ना चाहती है। ऐसे में फेसबुक को इसके लिए इन सरकारों को तरीका बताना होगा।
 
अमेरिका के अटॉर्नी जनरल विलियम बार के साथ ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई अटॉर्नी जनरलों ने फेसबुक से कहा है कि वो उनकी सरकारों के लिए व्हाट्‍सएप सहित दूसरे एनक्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर मैसेज पढ़ने के लिए कोई रास्ता तैयार करे।
 
एनक्रिप्टेड मैसेज का मतलब ऐसे मैसेज होते हैं जो टेक्स्ट फॉर्म में न होकर किसी कोड की फॉर्म में होते हैं और उन मैसेजों को भेजने वाले और प्राप्त करने के अलावा कोई और नहीं पढ़ सकता है।
 
फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को लिखे एक पत्र में उन्होंने ये मांग की। इस पत्र के बाद टेक कंपनियों और सरकार के बीच विवाद होने की आशंका है। टेक कंपनियां प्राइवेसी का हवाला देकर अपने यूजर्स की निजी चैट्स साझा नहीं करती हैं।
 
इस पत्र में उन्होंने लिखा कि कंपनियों को जान-बूझकर ऐसे सिस्टम बनाने से बचना चाहिए जिनसे किसी भी तरह से जानकारी ना मिल सके। ऐसा ना हो कि इस सिस्टम की वजह से गंभीर अपराध होने की सूरत में भी जांच ना हो सके।
 
फेसबुक की मैसेजिंग ऐप व्हाट्‍सएप एंड टू एंड एनक्रिप्शन का इस्तेमाल करती है। दुनियाभर में व्हाट्‍सएप के करीब 150 करोड़ यूजर्स हैं। इस पॉलिसी की वजह से खुद फेसबुक भी यूजर्स के मैसेज नहीं पढ़ सकता है। हाल में फेसबुक ने घोषणा की थी कि इंस्टाग्राम और फेसबुक मैसेंजर के लिए भी वो एंड टू एंड एनक्रिप्शन का फीचर लाने वाला है।
 
इस पत्र में ब्रिटिश गृह मंत्री प्रीति पटेल और ऑस्ट्रेलियाई गृहमंत्री पीटर डटन ने फेसबुक को लिखा है कि अपराधिक मामलों की जांच के लिए व्हाट्‍सएप के मैसेजों की जांच का अधिकार सरकारी एजेंसियों को दिया जाए।
 
साथ ही दूसरे प्लेटफॉर्मों पर एंड टू एंड एनक्रिप्शन लागू करने की योजना को फिलहाल टालने के लिए कहा है। फेसबुक ने इसके जवाब में कहा है कि यूजर्स को अपनी निजी बातचीत को निजी रखने का अधिकार है। जब भी किसी सरकार द्वारा वैध शिकायत सामने लाई जाती तो उसमें फेसबुक मदद करता है।
 
फेसबुक के प्रवक्ता जो ऑस्बोर्न ने कहा कि हम लोगों की निजता में पिछले दरवाजे से सेंध लगाने के सरकार के प्रयास का विरोध करते हैं।
 
तीनों सरकारों ने पत्र में अपने तर्क में लिखा है कि आतंकवादी, बच्चों का यौन शोषण करने वाले और दूसरे अपराधी इन तकनीकों का इस्तेमाल कर अपने गुनाहों को छिपाते हैं।
 
यह इस तकनीक का एक काला पहलू है। निजता और सरकार के बीच टकराव का ये मामला साल 2015 से शुरू हुआ जब ऐप्पल ने एक आतंकवादी के मोबाइल का लॉक प्राइवेसी का हवाला देकर खोलने से मना कर दिया था।
 
इस आतंकवादी ने 2015 में 14 लोगों को मार दिया था। ऐप्पल के मना करने के बाद एफबीआई ने बड़ी रकम खर्च कर इस लॉक को खुलवाया था।
 
एनक्रिप्शन का एक अच्छा पहलू यह है कि इससे पत्रकारों, सरकार का विरोध करने वालों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को सरकार के निशाने पर आने से बचाता है। साथ ही टेक कंपनियों का कहना है कि इससे एनक्रिप्शन से हैकर्स, अपराधियों और सरकार को ताकझांक करने से रोका जा सकता है।
 
मार्च में एनक्रिप्शन पॉलिसी को दूसरे प्लेटफॉर्मों पर लागू करने की बात कहते हुए जुकरबर्ग ने कहा था कि इस तरीके का इस्तेमाल कर लोग बुरे काम भी कर रहे हैं, लेकिन जल्दी ही ऐसी कोई तकनीक विकसित की जाएगी जिसके द्वारा ऐसे लोगों की पहचान की जा सके। आरएस/एनआर(एपी/रॉयटर्स)

वेबदुनिया पर पढ़ें

अगला लेख कश्मीर में पत्थरबाजी भी जारी है और बेगुनाहों का उत्पीड़न भी