Literature Apna Manch %e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a5%80 107122000081_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

ख़ामोशी...

Advertiesment
अवाज़ें ख़ामोशी पंकज जोशी
SubratoND
- पंकज जोश

अवाज़ें जब टकराती है,
तो आवाज़ नहीं करती,
कहीं छोड़ देती है एक ख़ामोशी,
कुछ और शब्दों को स्थान देने को,
शब्द चीखते हैं और आवाज़ खो जाती है,

वो कहते हैं मैं ख़ामोश हूँ,
पर मैं तो सुनता हूँ,
कुछ शब्द, कुछ आवाज़ें...

मैं तो निकला हूँ साथ लेकर अपनी आवाज़ को,
चीरने को सन्नाटा,
उठाने हर एक की आवाज़,
तम आस-पास का हटाने को,
अपने शब्दों को गुँजाने को,

पर फिर सुनता हूँ किसी और की,
मन में रह जाती है मन की,
वो मुस्काता है,
ख़ुश होता है, अपनी आवाज़ से,
और मेरी आवाज़ मुझ में ही है,
कई तूफ़ानों, कई ज़लज़लों, और उफ़ानों के बीच,
सहमी हुई, डरी हुई, दबी हुई, कुछ मुरझाई हुई...
और बहुत ख़ुश भी, चंचल भी...
ये आवाज़ कोई कहर नहीं ढाती,
बस निकलती है कंठ से,
और खो जाती है हवा में ना जाने कहाँ...
कुछ स्वर फैलाती हुई...
ख़ामोशी को चीरती हुई।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi