- अभिषेक पांडेय
बिखर के टूट गए ख्वाब कितने कच्चे हैं,
अश्क दामन में सहेजे थे, दाग अच्छे हैं।
सुनें तो दिल में उतर जाते हैं शेर तेरे
बहुत अच्छे हैं तेरे बोल मगर, सस्ते हैं।
न पूछ मुझसे मेरी जिंदगी के बारे में
तेरे सवाल मेरी हड्डियां खुरचते हैं।
आ रही है नई इक पौध हरे कांटों की
हमीं-हम हैं जो इन्हें सींच दिया करते हैं।